हरदोई। गेहूं की घटी पैदावार से किसान मायूस हैं। किसानों के सपनों पर मौसम ने तुषारापात कर दिया है। फसल देखकर किसान जार जार रो रहा है। एक एकड़ खेत में औसतन 15 से 20 क्विंटल गेहूं के उत्पादन के अनुमान पर फिलहाल मौसम का वार भारी पड़ रहा है। अभी करीब दो से पांच प्रतिशत गेहूं की कटाई हुई है जिसमें गेहूं का उत्पादन कहीं एक एकड़ में 12 क्विंटल का औसत आया है तो कहीं 14 से 16 क्विंटल का औसत है। कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि होली के बाद अचानक 32 डिग्री से 40 डिग्री तक पहुंचे तापमान ने एक सप्ताह में गेहूं को असमय ही पका दिया है। जिससे गेहूं का दाना हल्का पड़ गया है और उसका वजन कम हुआ है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान पिछेती बुआई वाले गेहूं को हो रहा है।
मौसम बन गया गेहूं के लिए खलनायक
कृषि वैज्ञानिक डा. वीके यादव और डा. अनिल कुमार ने कहा कि जनवरी और फरवरी में कोहरा एवं सर्दी कम पड़ी। इससे गेहूं की पौध में दाने के अंकुरित होने से फलने फूलने के लिए पर्याप्त नमी एवं ठंडा वातावरण न मिल पाना भी गेहूं के दाने का हल्का पड़ने के पीछे अहम कारण माना जा सकता है। इसके साथ ही पिछैती बुआई के गेहूं के लिए पिछले एक सप्ताह में अचानक चढ़े तापमान से गेहूं के पकने को लेकर विपरीत असर माना जा सकता है। ये कारण पैदावार घटने के पीछे अहम कारण हो सकते हैं। हालांकि जिन किसानों ने समय से गेहूं की बुआई के साथ आवश्यकता होने पर सिंचाई आदि के माध्यम से समय समय पर पर्याप्त नमी एवं ठंडक को लेकर कार्य किया होगा वहां पर उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
भूसे के साथ दानों को उड़ने से बचाना होगा
जिला कृषि अधिकारी विनोद यादव ने बताया कि जिले में करीब तीन लाख 29 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल हो रही है। प्रदेश में प्रति हेक्टेयर औसतन 33 से 34 क्विंटल उत्पादन माना जाता है। इस हिसाब से प्रति बीघा करीब पौने तीन क्विंटल एवं प्रति एकड़ 13 से 14 क्विंटल गेहूं का औसत उत्पादन माना जाता है। हरदोई में तमाम किसान एक एकड़ में 20 क्विंटल तक पैदावार करते रहे हैं और उनका गेहूं का औसत प्रति बीघा चार क्विंटल तक रहा है। ऐसे में उनके लिए पैदावार का घटना काफी निराशा जनक एवं कष्टकारक है।
हालांकि पूरे जिले में उत्पादन एवं गेहूं फसल की लागत का औसत अलग-अलग है। ऐसे में गेहूं के हल्के पड़ने को लेकर अब किसानों को सावधानी बरतनी होगी। थ्रेसरिंग करते समय गति का ध्यान रखना होगा ताकि हल्का दाना भूसे के साथ उड़ने न पाए। क्योंकि दाना ज्यादा हल्का पड़ने पर थ्रेसरिंग के दौरान उड़ जाने की आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि गेहूं के हल्के पड़ने एवं उत्पादन को लेकर अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग आंकड़े होंगे जो कि पूरी तरह से कटाई होने के बाद क्षेत्रवार रिपोर्ट आने पर स्पष्ट होगा कि कहां कितना असर पड़ा है।
बरसोहिया क्षेत्र में घटा गेहूं का उत्पादन
बरसोहिया क्षेत्र में एक एकड़ यानी पांच बीघा में 10 से 12 क्विंटल गेहूं का उत्पादन हुआ है जब कि दो साल पहले यह औसत डेढ़ एवं दो गुना तक था। ऐसे में किसानों के लिए लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है।
लागत निकलना भी मुश्किल
हरपालपुर/बरसेाहिया। गेहूं के घटे उत्पादन से परेशान किसानों ने कहा कि उम्मीद से आधा उत्पादन हुआ है। अभी भी पिछैती गेहूं के लिए हवा और तापमान नुकसान कर रहा है। गांव के किसान लालसिंह कहते हैं कि गेहूं का दाना हल्का पड़ जाने से पैदावार घट गई है। महेश पाल सिंह कहते हैं कि उत्पादन गिरने से साल भर की कमाई के सपने टूट गए। शमशुल एवं सत्यपाल कहते हैं कि उम्मीद के हिसाब से फसल न होने से कमाई की बात तो दूर लागत निकलना भी मुश्किल है। मनीष एवं मुन्नालाल कहते हैं पिछले कुछ वर्षों से मौसम किसानों के साथ खलनायकी कर रहा है। पिछले साल अतिवृष्टि/ओला से फसलें तबाह हुईं तो इस बार मौसम के साथ न देने से उत्पादन गिर गया है। फसली कर्ज निपटाना हो या फिर घर के कामकाज के लिए किसानों की कमाई का जरिया फसलों पर ही ग्रहण लग रहा है।