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Hardoi News: बच्चों से लेकर युवाओं में बढ़ रहीं दांतों की बीमारियां, कैंसर का डर

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फोटो-05- मेडिकल कॉलेज में दंत विभाग कक्ष में मरीज का उपचार करतीं चिकित्सक। संवाद
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हरदोई। बच्चों में कम उम्र में ही दांतों के एलाइनमेंट में दिक्कत और जबड़ों की अनियमित वृद्धि देखने को मिल रही है। अभी तक बुजुर्गाें में दांतों की समस्याएं होती थीं लेकिन अब बच्चों से लेकर युवा दांतों की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। बदलते खान-पान में जंक फूड का अधिक सेवन और तंबाकू की तल बीमारियां बढ़ा रहीं हैं। दंत चिकित्सा विभाग में रोजाना मरीज मसूढ़ों की बीमारी का इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
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दंत विशेषज्ञ डॉ. शिवम बताते हैं कि दांतों की सेहत का सीधा संबंध आहार से होता है। केक, पेस्ट्री, चॉकलेट्स, कैंडी, जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि में पाए जाने वाले रिफाइंड शुगर दांतों पर बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जो दांतों में कैविटी व सड़न पैदा कर दांतों की सतह को कमजोर कर देता है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की दंत चिकित्सा ओपीडी में रोजाना 150 से 200 मरीज जांच कराने पहुंच रहे हैं। इसमें अधिकांश मरीज मसूढ़ों में दर्द समस्या लेकर आते हैं।
दांतों में ठंडा गर्म पानी लगने से पीड़ित भी इलाज कराने पहुंच रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. शिवम यादव बताते हैं कि कोल्ड ड्रिंक का अधिक सेवन दांतों की ऊपरी सतह इनेमल को नुकसान पहुंचाता है। दांत के रोग का समय से इलाज न कराएं तो यह कैंसर में तब्दील हो सकता है।
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तंबाकू के सेवन से कैंसर का खतरा

तंबाकू, पान मसाला का सेवन दांतों और मुंह से संबंधित रोगों का प्रमुख कारण है। तंबाकू के सेवन से मसूढ़े कमजोर हो जाते हैं। इससे पायरिया (पेरीओडोंटटाइट्स) की समस्याएं उत्पन्न होती है। पायरिया में मसूड़ों से खून आता है और दांत हिलकर खुद गिर जाते हैं। यह मुंह के कैंसर का भी कारक होता है। प्री-कैंसरस अवस्था में लेउकोप्लेकिया (मुंह में सफेद धब्बे), या ओरल सब म्यूकस फाइब्रोसिस (मुंह का कम खुलना या मिर्च या कड़वा खाने पर मुंह में जलन होती है)।


दांतों की सफाई पर दें विशेष ध्यान
डॉ. शिवम ने बताया कि दांतों की सफाई के लिए दिन में दो बार मुलायम ब्रश और फ्लोरिडेटेड टूथपेस्ट से ब्रश करें। माउथवॉश और फ्लॉस का उपयोग भी कर सकते हैं। रिफाइंड शुगर, जंक फूड और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करें। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और प्रोटीन युक्त खाना खाएं। तंबाकू का सेवन न करें। साथ ही छह महीने में एक बार दंत चिकित्सक से जांच कराएं।
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