दीपावली से पहले ही जिले में वैध और अवैध रूप से पटाखे बनाने का धंधा तेजी
से शुरू हो गया है। आलम यह है कि नगर से लेकर ग्रामीण अंचल तक आबादी के बीच
आतिशबाजी का भंडारण किया जा रहा है वहीं आबादी के बीच ही उनका निर्माण भी
हो रहा है। कासिमपुर थाना क्षेत्र में घटना होने के बाद भी प्रशासन
आतिशबाजी के भंडारण को लेकर
बेफिक्र है। इसके चलते बेरोकटोक आतिशबाजी का
भंडारण जारी है। बताते चलें कि दीपावली के करीब जिले वैध व अवैध
आतिशबाजों ने आतिशबाजी का भंडारण शुरू कर दिया गया है। आतिशबाजी का भंडारण
आबादी के बीच घरों में किया जा रहा है। घर के अंदर अधिक मात्रा में
आतिशबाजी रखने से घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है। कासिमपुर के
गौसगंज में
पिछले दिनों आतिशबाजी के भंडारण के कारण एक घर में विस्फोट हो गया था। इससे
उसके मकान के साथ पड़ोसी का मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद भी
जिले में आतिशबाजी के बनाने और उसके भंडारण का कार्य जारी है। मगर इस ओर
किसी भी जिम्मेदार ने ध्यान देना जरूरी नहीं समझा है। इससे कभी भी कोई बड़ी
घटना हो सकती है।
इस तरह हो रहा कारोबार
आबादी
के बीच में 11 लाइसेंसधारी हैं जो कि सरायथोक पश्चिमी, मंगलीपुरवा फाटक,
अब्दुलपुरवा में कारोबार कर रहे हैं। इसी तरह पाली, गोपामऊ, शाहाबाद,
संडीला, मल्लावां आदि कस्बों में भी लाइसेंस हैं। यहां अनार, महताब, पटाखा
और तिकोना आदि बनाए जा रहे हैं।
यह है नियम
आतिशबाजी
के लाइसेंस जारी करने में यह निर्देश होते है कि जहां पर इसका निर्माण हो
वह आबादी से एक किमी दूर हो। आतिशबाजी पक्के मकान के स्थान पर एक कोठरी के
भीतर एक फीट ऊंचे चबूतरे पर बनाई जाए। आयुध नियमों के मुताबिक आतिशबाजी का
भंडारण आबादी क्षेत्र में नहीं होना चाहिए। जहां भंडारण हो वहां पर
अग्निशमन वाहन पहुंचने के लिए रास्ता होना चाहिए। उसके आसपास होटल, चाय की
दुकान, रेस्टोरेंट नहीं होना चाहिए।
अस्थायी लाइसेंस के लिए शर्तें
* आतिशबाजी की एक से दूसरी दुकान के बीच 15 फीट की दूरी होनी चाहिए।
* एक से दूसरी कतार के बीच कम से कम 40 फीट की दूरी होनी चाहिए।
* आतिशबाजी की दुकान में रोशनी के लिए पेट्रोमैक्स, बिजली के खुले तार और हैलोजन का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
* दुकान में फ्रेम बनाकर आतिशबाजी लगाई जाए।
बीते सालों में प्रमुख घटनाएं
* वर्ष 2008 में सांडी में नवाबगंज में हादसों में एक की मौत।
* वर्ष 2009 में टडिय़ावां कस्बें में अतिशबाजी बनाते समय विस्फोट में दो की मौत।
* 24 अप्रैल 2011 को सांडी के खिड़कियां में विस्फोट से चार लोगों की मौत।
* वर्ष 2012 में सरायथोक पश्चिमी में एक आतिशबाज के घर में आग से हजारों का सामान जला।
* वर्ष 2015 कासिमपुर के गौसगंज में आतिशबाजी के भंडारण के कारण एक घर में विस्फोट।
अग्निशमन विभाग के पास यह है संसाधन
जिला
मुख्यालय पर दो मोटर फायर इंजन, जिसमें एक 45 लीटर क्षमता वाला और दूसरा
25 लीटर क्षमता वाला है। एक जीप और एक बोलेरो कैंपस अग्निशमन विभाग के पास
मौजूद है। वहीं संडीला में एक मोटर फायर इंजन 45 लीटर क्षमता वाला है और एक
जीप की व्यवस्था की गई है।
खोजे नहीं मिल रहे हाइड्रेंट प्वाइंट
दीपावली पर अग्निकांडों का भय बना रहता है। कहने को तो शहर में किसी
अप्रिय घटना होने पर फायर ब्रिगेड को पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब 25
हाइड्रेंट प्वाइंट हैं। हकीकत में अधिकांश के निशान तक नहीं रह गए। कुछ
सड़क के नीचे दब गए तो कुछ अतिक्रमण की चपेट में आ गए। केवल चार प्वाइंट एक
पुलिस लाइन के सामने, एक जिला
कारागार के सामने, एक सिनेमा रोड पर व एक
रोडवेज बस अड्डे के पास सही बताया जा रहा है। ऐसे में कोई घटना हो जाए तो
फायर ब्रिगेड को समय पर पानी तक नहीं मिल पाएगा। हालांकि अग्निशमन अधिकारी
का कहना है कि शहर में चार पंप चालू कराए गए हैं। ये टंकियों पर लगे हैं और
उन्हीं से काम चलाया जाता है।
वर्जन
आबादी के बीच आतिशबाजी
भंडारण के मामले में जांच करवाई जाएगी। यदि ऐसे मामले मिले तो नियमानुसार
कार्रवाई करवाई जाएगी।- रमेश मिश्रा, जिलाधिकारी