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फसली बीमा ने भी किसानों से छला

Mon, 06 Apr 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
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किसानों के हितों के लिए संचालित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना जिले में फिलहाल लकीर की फकीर बनी नजर रही है। जी हा! आंकड़ों पर भरोसा करें तो तस्वीर साफ हो जाती है। 10 प्रतिशत किसान भी इस योजना का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं।
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इसे जिम्मेदारों की लापरवाही या फिर फसली बीमा योजना में प्रीमियम देने के बाद भी क्लेम न मिलने को ही बड़ी वजह माना जा सकता है, जिसके कारण किसान इस योजना की ओर आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। कहने को तो इस योजना के तहत बीमा का प्रीमियम जमा कराने वाले किसानों की फसलें आपदाओं से सुरक्षित हो जाती हैं।

यानी उनका बीमा कवर हो जाता है, पर बात जब आपदाओं के बाद क्लेम की आती है तो जिम्मेदार पल्ला झाड़ने से भी नहीं कतराते। रविवार को जिले के करीब आधा सैकड़ा किसानों से बात की गई तो इनमें से 45 किसानों से फसल बीमा की कि श्त बैंक ने काट ली।
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न तो इन्हें सूखा पड़ने पर कोई क्लेम दिया गया और न ही बारिश और ओलावृष्टि से क्लेम के मिलने के आसार नजर आ रहे है। कारण साफ है कि अब संबंधित बैंकें भी क्लेम के दावों से पल्ला झाड़ रही है। बैंक के जिम्मेदारों का कहना है कि इस बाबत गाइड लाइन नहीं मिली।

उधर, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के लिए शासन से अधिकृत बीमा कंपनी के स्थानीय कार्यालय के बारे में किसानों को तो दूर प्रशासन को ही जानकारी नहीं है। ऐसे में अब अंदाजा लगाना सहज है कि बीमा कंपनी स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं को सुनने एवं निस्तारण करने के प्रति कितना सजग है।

इस बाबत जब जिले की सर्वाधिक बैंक शाखाओं एवं केसीसी खातों वाली बैंक ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त के क्षेत्रीय प्रबंधक विनय श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि संभवतया बीमा कंपनी का स्थानीय स्तर पर कार्यालय नहीं है। बतौर स्थानीय प्रतिनिधि यहां काम कर रहे बीमा कंपनी के एक अफसर द्वारा बैंकों से संपर्क किया जाता है।

जिला कृषि अधिकारी डा. विनोद यादव ने भी स्थानीय स्तर पर बीमा कंपनी के कार्यालय की जानकारी होने से इंकार किया। उन्होंने बताया कि बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से बात होती है। जब इस प्रतिनिधि के मोबाइल नंबर पर रविवार को दोपहर बाद संपर्क करने का प्रयास किया गया तो बात नहीं हो सकी ।
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