विकलांग आवासीय कैंप मेें ठंड से मौत के बाद यामीन का
शव घर आते ही परिजनों में मातम छा गया। यामीन के पढ़ लिख कर किसी काबिल
होने की उम्मीदें सजाए गरीब परिवार को उसकी मौत से गहरा सदमा पहुंचा है।
गुरुवार को सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में यामीन को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया
गया।
ज्ञात हो कि समेकित शिक्षा के अंतर्गत विकलांग बच्चों को प्रशिक्षण
के लिए हरदोई शहर के सिनेमा रोड पर चल रहे कैंप में मूक बधिर पिहानी के
मोहल्ला लोहानी निवासी यामीन (14) पुत्र नगद अली को दो दिन पहले ही ठंड से
बीमार होने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
बीती शाम उसकी
मौत हो गई। गरीबी की स्थिति में जीवन यापन कर रहे उसके परिवार में इस हादसे
को लेकर मातमी माहौल छाया है। पिता नगद अली ने बताया कि उनके दो ही पुत्र
है। बड़ा पुत्र यासीन मेहनत मजदूरी के जरिए मुश्किल से ही अपने परिवार को
पाल रहा है। ऐसे उनके परिवार का जीवन कठिन हो गया।
वह खुद अब काम के लायक
नहीं रहे। इससे उन्होंने सरकारी योजना से लाभान्वित होने को मूक बधिर
बच्चे यामीन को प्रशिक्षण को भेजा था, पर जिम्मेदारों की लापरवाही ने
परिवार की उम्मीद यामीन को उनसे छीन लिया। पांच लड़कियाें में उन्हें अभी
भी दो का विवाह करना है और कोई पूंजी भी नहीं है। ऐसे में उनके परिवार को
यामीन से बड़ी उम्मीदें थीं जो यामीन के साथ ही खत्म हो गईं हैं।
शोकाकुल
परिजनों को सांत्वना देने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। गुरुवार को
दोपहर की नमाज के बाद यामीन की नमाजे जनाजा पढ़ी गई और उसे रामलीला रोड
स्थित ब्रिस्तान मेें दफन कर दिया गया। लोगों ने यामीन के परिजनों को
आर्थिक मदद देने की मांग की है।