नुमाइश मैदान में रासलीला का मंचन करते कलाकार।
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हरदोई। नुमाइश मैदान में चल रही रामलीला के मंचन के दौरान शनिवार को वृंदावन के कलाकारों ने वियोग में तड़प रहे राजा दशरथ का भावपूर्ण मंचन किया। राजा दशरथ के प्राण त्यागने व शोक में डूबी अयोध्या के मंचन को देख श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गईं।
श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रहे मंचन के दौरान कलाकारों ने राम विलाप का बखूबी मंचन किया। राम राम करते हुए राजा दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए। राजा के देहांत के साथ ही नगर में शोक छा गया।
तब कुल गुरु वशिष्ठ ने समय के अनुकूल उनके इतिहास को कहकर सभी का शोक दूर किया और नाव में तेल भरवाकर राजा के पार्थिव शरीर को उसमें रखवा दिया। फिर दूतों को बुलाकर कहा कि जल्द से जल्द भरत के पास जाओ और उन्हें शीघ्रता से अयोध्या लेकर के आओ किंतु राजा की मृत्यु का समाचार कहीं कि सी से न कहना।
इसके बाद कलाकारों ने भरत के नगर आगमन का मंचन किया। भरत ने नगर में प्रवेश किया। नगर के लोग भरत से मिलते हैं परंतु कुछ कहते नहीं हैं। चुपके से प्रणाम करके चले जाते हैं। तब भरत अपनी माता कैकेई के महल में पहुंचे।
भरत ने अपने ननिहाल की कुशल कह सुनाई और उसके बाद कुटिल और कैकेई ने राजा की मृत्यु का समाचार और राम के वनगमन की बात कह सुनाई। शोक में डूबी अयोध्या का मंचन देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। देर शाम मेला ग्राउंड में ही रासलीला का आयोजन हुआ। वृंदावन के कलाकारों ने कृष्ण लीला का मनमोहक मंचन किया।