राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को दी जाने वाली डाइट को विभागीय अधिकारी डकार रहे है। प्रसूताओं को पानी सी दाल और रोटी देकर खाना पूर्ति की जाती है। प्रसूताओं के भोजन में गड़बड़ी करने के लिए उनकी उपस्थित में खेल हो रहा है। प्रसूताओं को 24 घंटे में चलता कर दिया जाता है। उनको तीन दिन रोकना जरूरी नहीं समझा जाता है। पर कागजों में उनको निर्धारित समय के बाद भी दर्र्ज रखा कर गोलमाल किया जा रहा है। प्रसूताओं के लिए वाहन सेवा सिर्फ कागजों में ही दौड़ रहे हैं। प्रसूताएं को अपने वाहन से ही आना जाना पड़ रहा है।
बताते चले कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं कोे स्वास्थ्य केंद्र लाने व वापस घर भेजने के लिए वाहन की व्यवस्था का प्रावधान है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र आने वाली प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध कराई जाती है। स्वास्थ्य केंद्र पर साधारण व आपरेशन से प्रसव होने पर उनके स्वास्थ्य केंद्र पर रूकने के दौरान भोजन देने की व्यवस्था है। जिस पर विभाग प्रति प्रसूता प्रतिदिन 59 रुपये व्यय कर रहा है।
वहीं उनके आवागमन के लिए डीजल पर भी प्रति माह लाखों रुपये व्यय हो रहे है। मगर महिला चिकित्सालय व स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूताओं को सिर्फ दाल और रोटी देकर चलता कर दिया जाता है। जिसकी गुणवत्ता भी काफी निमभन होती है। जिसे अधिकतर महिलाएं लेती ही नहीं हॅै। जबकि विभाग में कागजों में योजना का क्रियान्वयन विधिवत हो रहा है और उनके मद में व्यय किया जा रहा है। सब कुछ जान कर भी जिम्मेदार इस ओर आंखें बंद किए हैं।