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Hardoi News: 35 दिन मेें भी दुरुस्त नहीं हो पाई सीटी स्कैन मशीन

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हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के दावों की हकीकत परखनी हो तो मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय का रुख जरूर करना चाहिए।
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यहां मरीजों को सुविधा देने के लिए पीपीपी मॉडल पर लगवाई गई सीटी स्कैन मशीन पिछले 35 दिनों यानी एक माह से अधिक समय से खराब है। ओपीडी में मरीजों को सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जा रही है, लेकिन मशीन खराब होने के कारण ज्यादातर मरीजों को प्राइवेट पैथाेलाॅजी जाना पड़ता है।
जिला चिकित्सालय परिसर में सीटी स्कैन मशीन लगी है। यह सीटी स्कैन मशीन एक जून को दोपहर बाद खराब हो गई थी। कभी एसी खराब होने के कारण मशीन नहीं चल पाई तो कभी यूपीएस की बैटरी खराब होने के कारण मशीन ने काम नहीं किया। एसी दुरुस्त कराया गया, यूपीएस के लिए नई बैटरी आ गईं, लेकिन सीटी स्कैन मशीन में और तकनीकी समस्याएं आ गईं।
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इन समस्याओं का निस्तारण कराने की कवायद किए जाने का दावा स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय जिम्मेदार करते हैं, लेकिन मशीन खराब होने के 35 दिन बाद भी इस कवायद का कोई नतीजा सामने नहीं आया। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले जिन मरीजों को सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जा रही है वह प्राइवेट पैथाेलॉजी सेंटर पर जाने को मजबूर हैं।

सीटी स्कैन मशीन खराब होने को लेकर सीएमएस डॉ. जेके वर्मा से सवाल हुआ तो उन्होंने बताया कि पिछले एक माह में तीन चिट्ठियां मरम्मत करने वाली एजेंसी और शासन को भेज चुके हैं। कुछ खामियां दूर हुई थीं, लेकिन कुछ नई समस्याएं मशीन मेें आ गईं। हमनें चिट्ठियां लिखी हैं, उम्मीद है कुछ होना चाहिए।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय में फिलहाल सीटी स्कैन की सुविधा निशुल्क है। मशीन खराब होने के कारण मजबूरी में लोगो को प्राइवेट पैथाेलाॅजी में सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। यहां 2,200 रुपये से 6,000 रुपये तक सीटी स्कैन में खर्च होते हैं। औसतन 80 सीटी स्कैन मेडिकल कॉलेेज की ओपीडी में रोज लिखे जाते हैं।
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