हरदोई। सीएसएन महाविद्यालय में स्नातक और परास्नातक में प्रवेश को लेकर कभी मारा मारी रहती थी लेकिन आज इस कालेज में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थी तैयार नहीं हैं। कारण साफ है कि यहां अधिकांश विषयों में प्रवक्ताओं की सीटें रिक्त पड़ी है जिस कारण छात्र छात्राओं की पढ़ाई लिखाई प्रभावित होती है। यही वजह है कि इस सत्र में कालेज में 1180 सीटें खाली रह गई। इसको लेकर कालेज प्रबंधन भी चिंतित है।
छात्रों के लिए शहर में कला संकाय से ग्रेजुएशन करने के लिए सरकारी संस्था के नाम पर सीएसएन पीजी कालेज है। जबकि छात्राओं के लिए सीएसएन पीजी कालेज के साथ-साथ आर्य कन्या महाविद्यालय भी हैं। कभी सीएसएन पीजी कालेज पढ़ाई के मामले में अग्रणी रहा लेकिन यहां पर प्रवक्ताओं की कमी का असर साफ दिखाई देने लगा है। यहां पर बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष में 660-660 सीटें के अनुसार कुल 1980 सीटें हैं। एमए प्रथम और द्वितीय वर्ष के लिए अलग-अलग विषयों की अलग-अलग सीटें हैं।
एमए प्रथम और द्वितीय वर्ष में 400-400 सीटें हैं। बीए प्रथम के प्रवेश को लेकर इस बार कोई मारामारी नहीं मची। प्रवेश को लेकर छात्र-छात्राओं ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। आलम यह रहा कि प्रवक्ताओं की कमी से जूझ रहे कालेज में बीए प्रथम वर्ष में 85 फीसदी सीटों पर छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। जबकि बीए द्वितीय व तृतीय वर्ष में करीब 35 फीसदी छात्र-छात्राओं के परीक्षा में पास न होने से इन कक्षाओं में 65 फीसदी सीटों पर छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिए। बीए और एमए में 1180 सीटों पर प्रवेश हो सके।
अंग्रेजी व इतिहास का कोई प्रवक्ता नहीं
आयोग की ओर से सीएसएन कालेज में अंग्रेजी और समाजशास्त्र विषय का कोई प्रवक्ता नहीं भेजा गया हैं। इससे अंग्रेजी साहित्य और भाषा एवं समाजशास्त्र का अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई लिखाई पूरी तरह से प्रभावित है। इसके अलावा हिंदी साहित्य व भाषा के लिए 11 शिक्षकों के सापेक्ष केवल एक शिक्षक कार्यरत है।
29 प्रवक्ताओं की कमी
सीएसएन कालेज में 43 शिक्षक व शिक्षकाओं की जरूरत है। जिससे पठन पाठन कार्य प्रभावित न हो, लेकिन यहां पर आयोग की ओर से 9 प्रवक्ता भेजने के बावजूद मुश्किल हल नहीं हुई हैं। यहां पर अभी भी 29 प्रवक्ताओं की कमी हैं।
क्या कहते हैं प्रभारी प्राचार्य
अंग्रेजी साहित्य और भाषा के शिक्षक न होने पर उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था की है। एक शिक्षक नि:शुल्क अपनी सेवाएं दे रहा है। बाकी शिक्षकों की कमी को लेकर पत्र लिखा गया था। विश्वविद्यालय स्तर से कालेज को नौ प्रवक्ता उपलब्ध कराए गए हैं। अभी भी 29 प्रवक्ताओं की कमी है। कालेज की कक्षाओं में शत प्रतिशत प्रवेश न होने के पीछे प्रवक्ताओं की कमी व कालेज मेें परीक्षा के दौरान होने वाल सख्ती भी अहम कारण है।
प्राचार्य डा. एके सिंह
कार्यवाहक प्राचार्य