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दलित किशोरी से गैंगरेप में चार को उम्रकैद

Mon, 20 Mar 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
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कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक
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हरदोई। मझिला थाना क्षेत्र में करीब 12 साल पहले दलित बालिका के साथ गैंगरेप के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट रामबाबू शर्मा ने सोमवार को चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। गैंगरेप में एक दलित भी शामिल था। उसे दस साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने दोषियों पर 6-6 हजार और एक पर 5 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को देने का आदेश भी दिया है। 
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अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना क्षेत्र के चठिया गांव निवासी दीप के पोते का 27 अप्रैल 2005 को मुंडन था। वहां ढोला (नृत्य व गीत) हो रहा था। गांव की एक किशोरी भी ढोला देखने गई थी। रात करीब 11 बजे किशोरी घर लौट रही थी। उसे अकेला पाकर गांव के शिवसागर, असलम, शराफत, अखिलेश और कामता उर्फ हसन्ने, किशोरी को उठा ले गए।

पांचों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और पीड़िता को वहीं छोड़कर भाग गए। किशोरी की शिकायत पर मझिला थाना पुलिस ने शिवसागर, असलम, शराफत, अखिलेश के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व दलित उत्पीड़न और कामता पर सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज की थी।
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पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने पांचों को सामूहिक दुष्कर्म का दोषी करार दिया। कोर्ट ने शिवसागर, असलम, शराफत, अखिलेश को उम्रकैद और कामता उर्फ हसन्ने को दस वर्ष की सजा सुनाई। दलित होने के कारण कामता उर्फ हसन्ने पर दलित उत्पीड़न का मुकदमा नहीं चला। 

किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस लापरवाही बरती। पहले मनमाने तरीके से रिपोर्ट दर्ज की फिर विवेचना में भी ढिलाई बरती गई। पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उसकी तहरीर फाड़ दी थी और दबाव डालकर अपने हिसाब से तहरीर लिखवा ली थी।

मुकदमा लिखने से धाराएं भी हल्की कीं और समय पर पीड़ित मेडिकल नहीं कराया। कोर्ट ने विवेचना तक में कई कमियां पाईं। इस पर विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रामबाबू शर्मा ने तत्कालीन थानाध्यक्ष सुभाष तिवारी और एसआई चौधरी दारोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसपी हरदोई को लिखा है। 
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