मनरेगा में अब जिम्मेदारों द्वारा ज्यादा रुचि नहीं
दिखाई जा रही है। त्रैैमासिक लक्ष्य के अनुरूप मानव दिवसों का सृजन नहीं हो
सका। सूबे के तमाम जिलों में ही ऐसी ही स्थिति पाई गई है। जिसको लेकर अब
ग्राम्य विकास विभाग ने एक एक्शन प्लान तैयार किया।
मनरेगा में लोगाें
को ज्यादा से ज्यादा काम देने के निर्देश हैं, पर जिम्मेदारों द्वारा
मनरेगा कार्यों में अब रुचि नहीं ली जा रही। जिसका परिणाम है कि निर्धारित
मानव दिवसों का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा। मानव दिवसों का लक्ष्य पूरा न
होने से अफसरों के माथे पर भी सिकन आने लगी है, जिसको लेकर ही अब ग्राम्य
विकास विभाग ने एक्शन प्लान तैयार किया।
ग्राम्य विकास विभाग ने प्रथम
त्रैमासिक माह में सितंबर 2015 के लिए सूबे में 826.02 लाख मानव दिवस के
सृजन को श्रम बजट का लक्ष्य निर्धारित किया, पर अभी तक सिर्फ 372.13 लाख
मानव दिवस ही सृजित हुए। सूबे में ऐसे 50 जनपद हैं, जिनमें लक्ष्य के 50
फीसदी भी मानव दिवस सृजित नहीं हुए, इसमें हरदोई जनपद भी शामिल है।
जिले
को सितंबर माह के लिए 29.44 लाख मानव दिवस के सृजन के निर्देश दिए गए, पर
सिर्फ 10.11 लाख का ही सृजन हुआ, जो लक्ष्य का 34 प्रतिशत है। निर्धारित
लक्ष्य से 50 फीसदी भी मानव दिवस सृजित न करने वाले जिलों में ही अब
ग्राम्य विकास विभाग ने प्रयोग के तौर पर एक्शन प्लान लागू किया है।
जिसमें
पौधरोपण, जल संरक्षण और इंदिरा व लोहिया आवास योजना में कार्य करवाकर मानव
दिवस के सृजन का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। ग्राम्य विकास के अपर आयुक्त
मनरेगा रणवीर प्रसाद ने डीएम को पत्र भेजकर प्लान के अंतर्गत रणनीति बना
कार्रवाई करने तथा व्यक्तिगत लाभार्थी एवं आजीविका संबंधी कार्यों पर भी
जोर देने के निर्देश दिए।