हरदोई। कोरोना काल में निर्माण कार्य न के बराबर है। इसका सीधा असर सीमेंट, सरिया व लोहे के कारोबार पर पड़ रहा है। सीमेंट-मौरंग व्यवसायियों के पास पहले के मुकाबले आधे आर्डर भी नहीं आ पा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि कोरोना ने सीमेंट सरिया के व्यवसाय को जंग लगा दी है। इसके कारण व्यापारी परेशान हैं। हाल ये है कि पहले निर्माण सामग्री के कारोबार से तीस हजार लोगों को रोजगार मिलता था। अब ये आंकड़ा करीब 12 हजार पर सिमट गया है।
सीमेंट व सरिया उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों से ही कुछ जान बची है। आम लोग मकान व दुकान के निर्माण कार्य से बच रहे हैं। इससे धंधा काफी मंदा चल रहा है। उद्योग व्यापार मंडल के युवा जिलाध्यक्ष विभु गुप्ता का कहना है कि निर्माण कार्य ठप होने से पचास फीसदी भी बिक्री नहीं हो पा रही है। सीमेंट सरिया सेक्टर में ज्यादातर मजदूर दिहाड़ी पर ही काम करते हैं। स्थिति ये है कि पहले जहां 15 से 20 मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब पांच से सात मजदूरों ही हैं।
निर्माण तो घट गया पर रेट बढ़ गए
कोरोना काल में लोहे व सीमेंट के रेट भी बढ़ गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक, फैक्ट्रियों में निर्माण कम हो गया है। लॉकडाउन के बाद से जब काम कम है तो अधिकांश मजदूर गांवों में ही खेती करने लगे हैं। लॉकडाउन के पहले 40 से 42 रुपये प्रति किलो बिकने वाला लोहा अब 45 रुपये में मिल रहा है। वहीं पाइप 50 से 56 रुपये व चादर 77 की जगह 85 रुपये प्रति किलो में बिकने लगी है। मौरंग के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं। 60 रुपये फीट बिकने वाली मौरंग अब 80 रुपये फीट तक में उपलब्ध हो पा रही है। इसके कारण निर्माण कार्यों में कमी आई है।
कारोबारियों ने बताया दर्द
उद्योग व्यापार मंडल के युवा जिलाध्यक्ष विभु गुप्ता का कहना है कि निर्माण कार्य ठप होने से सीमेंट की खपत कम हो गई हे। केवल दो बड़े सरकारी प्रोजेक्ट छोड़कर बाकी सरकारी कार्य भी ठप पड़े हैं।
लखनऊ रोड निवासी व्यवसायी विवेक तिवारी का कहना है कि बिक्री 50 फीसदी पर सिमट गई है। मजदूरी में कटौती तो नहीं हुई पर दिहाड़ी मजदूरों की संख्या लगातार घट रही है।
शाहजहांपुर रोड निवासी व्यवसायी अवनीश त्रिवेदी का कहना है कि लोहे की ढुलाई में लगे टेपों का भी चालान हो रहा है। इस तरह की कार्रवाई से कारोबारी परेशान हैं।
मन्नापुरवा रोड निवासी व्यवसायी आशीष प्रजापति का कहना है कि 35 से 40 फीसदी व्यवसाय हो पा रहा है।
बालामऊ निवासी व्यवसायी संजय गुप्ता का कहना है कि इधर बिजली की दरें भी बढ़ गईं हैं। काम कुछ है नहीं और ऊपर से अतिरिक्त खर्चों से व्यवसायी ज्यादा परेशान हैं।
शाहाबाद परेली निवासी व्यवसायी उमेश पाठक का कहना है कि सीमेंट, मौरंग व सरिया का कारोबार वैसे भी कम हो गया है। जल्द ही निर्माण संबंधी व्यवसाय पटरी पर न आया तो दिक्कत होगी। सरकार को मदद करनी चाहिए।
जिले में सरिया की दुकानें - 400
सीमेंट की दुकानें - 500
पहले रोजगार पाने वाले लोग : 30000
अब रोजगार पा रहे -12000