हरदोई। परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को यूनिफार्म वितरित करने के मामले में जहां विभाग के कपड़ा न दे पाने के कारण 82 हजार छात्रों को अभी भी यूनिफार्म नहीं मिल सकी है, वहीं अब पहले हुई कपड़ा खरीद में भी खेल की बात सामने आई है। बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों को कमीशन का खेल हाथ से निकलता दिखा, तो उन्होंने फर्म विशेष से कपड़ा खरीद का रास्ता निकाल लिया। प्रधानाचार्यों और बीईओ को इन फर्मों का ही पता दिया गया और गुणवत्ता को किनारे रख यहीं से कपड़ा खरीद की गई।
जिले के 2644 परिषदीय विद्यालयों के 532472 विद्यार्थियों को निशुल्क यूनिफार्म का वितरण स्वयं सहायता समूहों के जरिये किया जाना था। समूहों को अब तक 450055 विद्यार्थियों की यूनिफार्म के लिए कपड़ा दिया गया है। खास बात ये है कि जो कपड़ा खरीदकर दिया गया, उसके लिए अधिकांश जिम्मेदारों को फर्म विशेष ही नजर आईं। बड़ी संख्या में इन फर्मों से ही कपड़ा खरीदा गया।
दूसरी जगह से खरीद पर बता दी कपड़े में खामी
यूनिफार्म वितरण में कमीशन का खेल हाथ से न जाने देने के लिए एक बड़े विभागीय अधिकारी ने पूरा रुतबा दिखाया। कुछ अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों ने अपनी सुविधा और गुणवत्ता के मुताबिक कपड़े की खरीद कर ली, तो ये कपड़ा गुणवत्ताहीन बताकर वापस करा दिया गया। इसके बाद बाकायदा साहब ने पता दिया और फिर उसी फर्म से कपड़े की खरीद हुई। अब महकमे में नौकरी करनी है तो साहब की बात को काटा भी नहीं जा सकता। ऐसे में गुणवत्ता का तो पता नहीं, लेकिन विशेष फर्म से ही कपड़ा खरीद लिया गया।
तो ये है साहब की कृपा
बेसिक शिक्षाविभाग से स्वयं सहायता समूहों को कपड़ा पहुंचाने को लेकर कुछ खंड शिक्षा अधिकारियों ने औपचारिक तौर पर इशारों में सिर्फ यही कहा कि फर्म वही है, जिस पर साहब की कृपा है।