हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में सुविधाओं का दावा भले किया जा रहा हो लेकिन हकीकत तो यह है कि मरीजों को दवाएं पूरी नहीं मिल रही हैं। चोट और दर्द निवारक दवाओं के लिए भी मरीजों को मेडिकल स्टोर पर जेब ढीली करनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार हर बार दवाओं की कमी को पूरा करने का कोरा आश्वासन देते हैं लेकिन कमी लगातार बनी हुई।
बुधवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 1245 के करीब मरीजों ने पर्चे बनवाए। इनमें करीब 210 मरीज हड्डी रोग और 260 मरीज सर्दी, खांसी, जुकाम बुखार के शामिल रहे। कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, कंधे का दर्द, सर्वाइकल आदि की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा वहीं कॉलेज की ओपीडी में जनरल फिजीशियन, चेस्ट फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ और नाक, कान और गला सर्जन के पास भी मरीजों की भीड़ रहती है।
मरीज चिकित्सीय परामर्श के बाद दवा काउंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें आधी अधूरी दवाएं मिल रही हैं। कई मरीजों को एक तो एक भी दवा नहीं मिलती है। इन दिनों सबसे अधिक दर्द में प्रयोग होने वाले डाईक्लोफेनिक जेल ट्यूब, चोट का बीटाडीन और खांसी में प्रयोग किए जाने वाले कफ सिरप की डिमांड अधिक है। जो बीते डेढ़ माह से मेडिकल कॉलेज में दवा काउंटर पर उपलब्ध ही नहीं है। दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए हर बार कोरा आश्वासन दे दिया जाता है लेकिन कमी पूरी नहीं हो रही है। दवाएं मेडिकल स्टोर से अधिक दामों में खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
केस-1- शहर के मोहल्ला अशरफ टोला निवासी अन्नू के सिर में चोट लग गई। परिजन उन्हें चिकित्सीय परामर्श के लिए लेकर आए। यहां पर चिकित्सीय परामर्श के बाद जब परिजन दवा लेने के लिए गए तो चिकित्सक की ओर से लिखी गई कोई भी दवा काउंटर पर नहीं मिली। जबकि चोट और दर्द की दवाएं ही चिकित्सक ने लिखी थीं। काउंटर कर्मियों ने सभी दवाओं पर गोला बनाकर वापस कर दिया।
केस-2- जटौली निवासी राजवीर राजवंशी को चिकित्सक ने शुगर और उच्च रक्तचाप से संबंधित दवा लिखी। काउंटर पर पहुंचे तो छह दवाओं में से सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। शुगर संबंधित दवा काउंटर पर नहीं दी गई। मरीज के तीमारदार मोहन ने बताया कि वह अभी मेडिकल स्टोर से दवा लेकर आए हैं। पांच दवाएं 70 रुपये में मिली हैं। बताया कि इतनी महंगी दवा लेने के लिए कई बार सोचना पड़ता है। जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
दवाओं का पैटर्न आज भी जिला अस्पताल का
जिला अस्पताल भले ही पांच साल पहले स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में तब्दील हो गया है लेकिन दवाओं का मानक अभी तक नहीं बदला। मेडिकल कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार तय मानक के अनुरूप जिला स्तरीय चिकित्सालय में 278 प्रकार की दवाएं, सीएचसी पर 182 प्रकार की, पीएचसी पर 90 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में 735 प्रकार की दवाओं का मानक तय है लेकिन जिले में 340 प्रकार की दवाएं ही आती हैं उस पर भी प्रबंधन दवाएं पूरी नहीं कर पा रहा है।
दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। मरीजों की संख्या अधिक होती है, शासन स्तर से भी सभी सूचीबद्ध दवाओं के लिए आग्रह किया गया। दवा काउंटर पर जो दवाएं नहीं हैं उनकी जानकारी कर कमी जल्द ही पूरी की जाएगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज