पिहानी सीएचसी पर प्रसव के बाद हालत बिगड़ने पर हरदोई रेफर की गई प्रसूता ने जिला अस्पताल में इलाज शुरू होने से पहले ही दम तोड़ दिया। परिजन चिकित्सकाें पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव ने मामले में पर्याप्त सावधानी बरते जाने का दावा किया है।
कोतवाली पिहानी के चौकीदार अशोक कुमार की पत्नी सोनी वर्मा (30) को भोर में प्रसव पीड़ा होने पर उसे सीएचसी पिहानी में भर्ती करवाया गया था। भर्ती के चंद मिनट बाद ही उसने पुत्री को जन्म दिया। बताया जाता है कि प्रसव के तकरीबन आधे घंटे के बाद प्रसूता को ब्लीडिंग शुरू हो गई।
हालत बिगड़ते देख डा. सबा खातून ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार हरदोई में भर्ती कराए जाने की प्रक्रिया के बीच ही सोनी की मृत्यु हो गई थी। चिकित्सकों ने देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि वार्ड से धूप मेें लिटाए जाने में सावधानी नहीं बरती गई इसके अलावा जिला अस्पताल में भी भर्ती प्रक्रिया में देरी से उसकी पत्नी की जान गई है।
इस बारे में बगौछा गांव के प्रधानपति लोकनाथ ने आरोप लगाया सीएचसी से समय रहते प्रसूता को रेफर नहीं किया गया, जिसके सबब उसकी जान गई है। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डा. जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रसव बाद अचानक शुरू हुई ब्लीडिंग पर एक सीनियर महिला चिकित्सक समेत कई डाक्टरों ने महिला को देखा और आक्सीजन के साथ उसे हरदोई रेफर किया गया। उन्होंने कहा कि महिला की यह सातवीं डिलीवरी बताई जा रही है जिससे प्रसूताओं में प्रसव बाद ऐसी स्थिति सामने आने की संभावना अधिक रहती है।
मंजूरी के बावजूद अब तक शुरू नहीं हो सका ब्लड स्टोरेज
जिला अस्पताल के बाद सबसे ज्यादा प्रसव पिहानी सीएचसी पर होते हैं। इस कारण शासन ने इसे एफआरयू सेंटर बनाते हुए ब्लड स्टोरेज को मंजूरी दी थी। कई वर्ष पहले ही मंजूरी मिलने व उपकरण आ जाने के बावजूद सीएचसी का ब्लड स्टोरेज स्टाफ की कमी के कारण बंद पड़ा है। बताते है कि हाल ही में इसमें स्टाफ की भर्ती भी कराई जा चुकी हैं लेकिन अब तक कोई कर्मचारी यहां नहीं पहुंच सका है।
सीएचसी अधीक्षक डा. जितेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रसव बाद अकसर अत्याधिक रक्तत्राव से ही प्रसूताओं की मौत होती है। ऐसे मामले सामने आने पर सीएचसी से रेफर के अलावा दूसरा चारा फिलहाल नहीं है। लेकिन ब्लड स्टोरेज के संचालन के बाद ऐसे मामलों में मरीज को रेफर किए बगैर ही सीएचसी पर संभाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि लगभग तमाम उपकरण मौजूद है। स्टाफ की तैनाती भी हो चुकी है।
संबंधित सीएचसी पर स्टाफ भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी होते ही यहां पर ब्लड स्टोरेज कार्य करने लगेगा जिससे काफी हद तक प्रसूताओं की जान को बचा पाने में कामयाबी पाई सकेगी। उन्होंने कहा कि कभी कभी इतनी तेजी से ब्लीडिंग होने लगती है कि महिला को तुरंत खून की आवश्यकता होती है लेकिन उसे 27 किमी तक आधे घंटे का सफर तय करने के बाद ही ब्लड मिल पाता है, जबकि इतना समय नहीं होता है। इसलिए सीएचसी पर ही ब्लड की उपलब्धता से ऐसे मामलों में होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी।