नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन के जन्म दिवस पर शियाओं के
घरों में चरागां कर खुशियां मनाई गई। इस दौरान आयोजित महफिले मुशायरा में
शोरा-ए-कराम ने हजरत हुसैन की शान में कसीदा ख्वानी कर उन्हें सलाम पेश
किया।
कसबे की मसजिद हैदरी में बीती रात आयोजित महफिल में हुर
सुल्तानपुरी ने शेर पढ़ा ‘हश्र तक जारी रहेगा तेरी हैबत का असर, अब कभी
पानी पे पहरा नहीं होगा अब्बास’। अफरोज आलम जैदी ने शाने हैदर बयान की ‘ये
भी खुदा ने की है फजीलत अली के नाम, कुरान कर रहा है तिलावत अली के नाम’।
शुऐब रजा ने शाने अली बयान की ‘मुश्किलों मेें जब घिरे मुश्किल कुशा तक आ
गए’। शुऐब जैदी ने पढ़ा ‘वो जिसने अबरू ए अहमदे मुख्तार देखी है, उसी ने
मुट्ठियों में वक्त की रफ्तार देखी है’। इसके अलावा अन्य बाहरी व मेहमान
शायरों ने कलाम पेश किए।
उधर, घरों मेें पकवान बनाए गए और दस्तर ख्वान सजा
कर नवासा-ए-रसूल का यौमे पैदाइश मनाया गया। मसजिदाें और घरों पर चरागां कर
खुशियां मनाई गईं। मसजिदाें पर तकरीर के जरिए इमाम हुसैन की शख्सियत पर
चर्चा करते हुए उलमा-ए-कराम ने कामयाब जिंदगी गुजारने को उनके बताए रास्ते
पर चलने का आह्वान किया।
उलमा-ए-कराम ने बताया कि हजरत हुसैन का जीवन सब्र
और शुक्र का नमूना है। हमें चाहिए कि आपके जीवन को अपनी जिंदगी के लिए
नमूना बनाएं।