जिले में बोर्ड परीक्षा कें द्रों के चयन में मानकों
की अनदेखी का खामियाजा परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ेगा। लंबी कवायद के बाद
जिले में 1.43 लाख परीक्षार्थियों के लिए बनाए गए 300 परीक्षा केंद्राें
में करीब 50 फीसदी कें द्रोें पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है।
कई केंद्र ऐसे
भी बनाए गए जहां परीक्षार्थियों के लिए फर्नीचर का इंतजाम भी नहीं है। ऐसी
स्थिति में प्रशासन का नकलविहीन परीक्षा कराने का दावा कितना कारगर होगा
यह 19 फरवरी को पता चलेगा। जिले में बोर्ड परीक्षा केंद्रों को लेकर
अफसरों में छिड़ी जंग का नतीजा है कि चयनित 300 परीक्षा केंद्रों में
मानकों की अनदेखी की गई है।
अधिकांश ऐसे स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया
गया है, जहां फर्नीचर से लेकर कमरे की छत तक का टोटा है। कोथावां क्षेत्र
में स्थित एक परीक्षा केंद्र में 10 कमरों में मात्र 4 कमरों मेें ही छत
पड़ी है, जबकि छह कमरों मेेें न तो फर्नीचर है, न ही छत पड़ी है।
ऐसे मेें
इन्हीं खुले कमरोें मेें दो कालेजाें के परीक्षार्थियों को परीक्षा देनी
होगी। उधर, हरपालपुर क्षेत्र मेें बनाए गए एक दर्जन परीक्षा केंद्रों में
तीन को छोड़कर अन्य वित्तविहीन स्कूलों को सेंटर बनाया गया है। डिबार घोषित
एक स्कूल को यहां परीक्षा केंद्र बनाया गया।
कुछ केंद्रों पर फर्नीचर,
पेयजल और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं, पर जिम्मेदार बेखबर हैं। सूत्रों
की मानें तो कई केंद्र जुगाड़ से परीक्षा केंद्र बनवाए गए हैं। फिलहाल नकल
के लिए यह क्षेत्र में पहले भी खासा चर्चित रहा है। उधर, पाली क्षेत्र में
स्थित जीजीआईसी को परीक्षा केंद्र बनाया गया।
सरकारी होने बावजूद इस स्कूल
में 50 फीसदी परीक्षार्थियों को बैठने को नहीं मिलेगा। सूत्रों की मानेें
तो यहां तीन कमरों में फर्नीचर का इंतजाम है, ऐसे मेें अधिकांश
परीक्षार्थियोें को जमीन पर बैठकर परीक्षा देनी होगी। इस केंद्र पर 406
परीक्षार्थी परीक्षा देंगे, पर स्कूल में आवारा जानवर घूम रहे और कंडे भी
पथे दिखे।
हालांकि, प्रधानाचार्या मंजू ने बताया कि उन्होंने डीएम से
नवनिर्मित स्कूल भवन में परीक्षा संपन्न कराने का अनुरोध किया था, पर अभी
अनुमति नहीं मिली। इस केंद्र पर शौचालय के दरवाजे टूटे हैं। क्षेत्र के
एक अन्य परीक्षा केंद्र में 411 परीक्षार्थियों को परीक्षा देनी है, पर
दोनों ही स्कूलों में कक्ष निरीक्षकों की कमी बताई जा रही है।
इधर,
बिलग्राम स्थित जीआईसी परीक्षा केंद्र की बाउंड्रीवाल टूटी है। ऐसे में
अराजक तत्वों का यहां आना जाना लगा रहता। इस केंद्र पर नकलविहीन परीक्षा
कराना प्रशासन के लिए चुनौती है।