लखनऊ-हरदोई हाइवे को फोरलेन करने की तैयारियों को
झटका लगा है। अब हाइवे को सिर्फ संडीला तक ही फोरलेन किया जाएगा। इसके आगे
सिर्फ सड़क को चौडा किया जाएगा। ऐसे में फोरलेन के लिए तैयार 1200 करोड़ के
संभावित स्टीमेट में संशोधन तय है। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में
अफसरों को आदेश भी मिल गया है।
ज्ञात हो कि इससे पहले हरदोई से लेकर
लखनऊ तक फोरलेन सड़क बनाने का प्रस्ताव था। इससे पहले दो वर्षों से बाईपास
के लिए आस लगाए बैठे शहर के लोगों को अभी तक बाईपास की सौगात नहीं मिल सकी,
जबकि इससे के लिए 36 करोड़ रुपये का स्टीमेट पीडब्ल्यूडी द्वारा भेजा जा
चुका है।
इसके अलावा हरदोई-लखनऊ हाइवे को लेकर फोरलेन करने की मंजूरी मिलने
की बात सामने आई थी, पर अब फोरलेन का मामला संडीला तक सिमटता नजर आ रहा
है। ज्ञात हो कि फोरलेन के लिए इस्टीमेट बनाने के दौरान कहा गया था कि
पीडब्ल्यूडी के पास फोरलेन सड़क बनाने को पर्याप्त अपनी भूमि है और भूमि
अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं होगी, पर अब इस ओर खामोशी है।
इस बाबत जब
पीडब्ल्यूडी के नोडल अधिकारी वीके श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने
बताया कि अभी स्टीमेट फाइनल नहीं है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि फोरलेन
सिर्फ संडीला तक और उससे आगे बाद सड़क के चौड़ीकरण संबंधी निर्देश मिले
हैं। अफसरों से बात चल रही और उनके निर्देशानुसार कार्य किया जाएगा।
उधर,
लखनऊ-संडीला हाइवे के फोरलेन और चौड़ीकरण कार्य को लेकर बन रहे स्टीमेट को
लेकर पीडब्ल्यूडी ने बीएसएनएल से हाइवे पर पड़ी केबिल के डैमेज होने की
आशंका में नई केबिल ओएफसी बिछाने का स्टीमेट मांगा है। स्टीमेट मिलने के
बाद यदि धनराशि शासन से मिलती है, तो हाइवे पर बीएसएनएल द्वारा सड़क का
निर्माण शुरू होने से पहले ओएफसी बिछाकर अपने नेटवर्क को उससे जोड़ लिया
जाएगा।
लखनऊ-हरदोई हाइवे के किनारे कुछ निजी क्षेत्र की टेलीकाम कंपनियों
की भी ओएफसी पड़ी हुई, जिससे उनका नेटवर्क जुड़ा हुआ है। उनकी ओएफसी को
लेकर अभी तक जिले में कोई हलचल नहीं है।