बेनीगंज। अधिमास में चल रही परिक्रमा शुक्रवार को गिरधरपुर उमरारी पड़ाव पर आई। संचालक महंत गोविंददास महाराज ने कहा कि परिक्रमा से सभी तीर्थों का फल मिल जाता है। चौरासी कोसी परिक्रमा की शुरुआत सतयुग में नैमिष धाम से हुई थी।
महंत ने कहा कि जब माता सती का जला हुआ शरीर लेकर भगवान शिव तांडव कर रहे थे। तब भगवान नारायण ने सुदर्शन चक्र से माता के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए थे। इसमें माता सती का हृदय नैमिष में गिरा था। इससे नैमिष की मां ललिता देवी का एक नाम हृदयेश्वरी भी है। नैमिष में ही सूत जी उग्रश्रवा ने शौनक आदि 88,000 ऋषियों को कथा सुनाई थी। परिक्रमा में नेपाल, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, ओडिशा सहित कई अन्य प्रदेशों के भी श्रद्धालु शामिल हैं।