बीएसएनएल बचाओ राष्ट्र बचाओ का नारा देकर अपनी बीस
सूत्रीय मांगों को लेकर फोरम आफ बीएसएनएल यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को
बीएसएनएल के अफसर और कर्मी दो दिन की हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के पहले दिन
कामकाज पूरी तरह ठप रहने से जहां लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ा, वहीं
प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की नियत में खोट है और
संघर्ष अब बहुत जरूरी है।
सिविल लाइन टेलीफोन केंद्र के बाहर सरकार
विरोधी प्रदर्शन करते हुए कर्मियों व अफसरों को संबोधित करते हुए फोरम के
जिला कनवीनर कामरेड वाईपी गुप्ता ने कहा कि सरकार की नीति व नियत में खोट
है। सरकार पूरी तरह से पूंजीपतियों के हाथों बिकी हुई है।
कहा कि बीएसएनएल
से स्पैक्ट्रम के नाम पर जबरन वसूला गया 6745 करोड़ रुपये सरकार वापस नहीं
कर रही है। फोरम अध्यक्ष कामरेड मो. आलम ने कहा कि बीएसएनएल कर्मी और अफसर
एक हैं। हम सभी बीएसएनएल को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते, लिहाजा बेमियादी
हड़ताल के बदले 21, 22 अप्रैल की दो दिवसीय हड़ताल कर रहे।
उन्होंने कहा
कि फोरम सरकार का ध्यान बीएसएनएल विरोधी नीतियों की ओर आकर्षित करना चाहता
है। सरकार की गलत नीतियों से बीएसएनएल को घाटा उठाना पड़ रहा है। उस घाटे
का ठीकरा सरकार बीएसएनएल अफसरों और कर्मियों के सिर पर मढ़ रही है।
कर्मियों की मूलभूत जरूरतों जैसे मेडिकल, टीए, ओटीए आदि की कटौती कर या बंद
करके प्रभावित कर रही है। इस मौके पर एमयू खान, विकास वर्मा, एसके मिश्रा,
एसएन मिश्रा, शिवशंकर लाल, घनश्याम बाजपेई, शिवमंगल दीक्षित, भभूती
प्रसाद, रविंद्र त्रिपाठी, सुधा
देवी, मनोरमा शुक्ला, राजेश कुमार आदि मौजूद थे।