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Hardoi News: महिला को जिंदा जलाकर मार डालने में देवर-देवरानी को आजीवन कारावास

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हरदोई। तकरीबन नौ साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने से झुलसी महिला की मौत के मामले में जिला जज रीता कौशिक ने देवर और देवरानी को दोषी करार दिया। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने माना कि केरोसिन डाल महिला को जलाया गया था और गंभीर रूप से जल जाने के कारण हुए सेप्टीसीमिया से उसकी मौत हुई थी।
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उन्नाव जनपद के औरास थाना क्षेत्र के नियाजअली खेड़ा निवासी शमशाद खान ने संडीला कोतवाली में चार दिसंबर 2017 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि बेटी साहरीन का निकाह संडीला क्षेत्र के मदरपुर मंडई निवासी कलीम के साथ किया था। घटना से छह साल पहले कलीम की मौत हो गई थी। साहरीन अपने तीनों बच्चों के साथ ससुराल में रह रही थी। घटना से तीन माह पहले ससुराल में एक बाग बेचा गया था। साहरीन अपने हिस्से की रकम मांग रही थी। इस कारण तीन दिसंबर 2017 को कमरे में बंद कर पिटाई करने के बाद केरोसिन डालकर उसे आग के हवाले कर दिया गया था।
गंभीर हालत में उसे संडीला सीएचसी से लखनऊ रेफर किया गया था। पुलिस ने मृतका की सास नन्हक्को, देवर पप्पू, देवरानी छुटक्की उर्फ अफसाना, चचेरे देवर गुड्डू और चचेरे ससुर बरसाती के खिलाफ हत्या के प्रयास की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। उपचार के दौरान 19 दिसंबर 2017 को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल लखनऊ में साहरीन की मौत हो गई थी। इस पर पुलिस ने पहले से दर्ज मामले में हत्या की धाराएं बढ़ाई थीं।
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विवेचना के बाद पुलिस ने पप्पू उर्फ असलम, बरसाती उर्फ असद अली, छुटक्की उर्फ रुखसाना और गुड्डू उर्फ साजिद के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। नन्हक्को का नाम निकाल दिया था। सुनवाई के दौरान बरसाती उर्फ असद अली और गुड्डू उर्फ साजिद की मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष ने 15 गवाह पेश किए। इनमें मृतका के परिजन, चिकित्सक, मजिस्ट्रेट और विवेचक भी शामिल थे। जिला जज रीता कौशिक ने मृतका के देवर पप्पू और देवरानी छुटक्की को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


मृतका के पिता समेत चार गवाह मुकरे
मौत के पहले दिए गए बयान से हुई सजा के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले मृतका के पिता शमशाद खान बयानों से मुकर गए थे। उन्होंने न्यायालय में कहा कि साहरीन को आरोपियों ने नहीं जलाया था। दावा किया था कि साहरीन चूल्हे पर खाना बना रही थीं। इस दौरान जलती लकड़ी से उसके कपड़ों में आग लग गई थी। बचने के प्रयास में रसोई में रखी केरोसिन भरी बोतल गिर गई थी। इस कारण आग लगने से साहरीन झुलस गई थीं। इसी तरह चार गवाह भी बयानों से मुकर गए थे।

मृत्यु पूर्व दिए गए बयान बने सजा का आधार
सीएचसी संडीला के चिकित्सक डॉ. शक्ति प्रकाश आनंद ने बयानों में बताया था कि साहरीन 45 प्रतिशत झुलसी हालत में सीएचसी आई थी। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट डॉ. सृष्टि धवन ने साहरीन के बयान दर्ज किए थे। मृत्यु पूर्व दिए गए बयान सजा का आधार बने। इसमें साहरीन ने बताया था कि देवरानी छुटक्की, पप्पू और गुड्डू पेप्सी की बोतल में केरोसिन लाए और उसके मुंह से नीचे तक डाल दिया। उसने कहा कि वहां कई लोग थे, इसलिए वह यह नहीं बता सकी कि माचिस किसने जलाई। उसने यह भी बताया कि उसने बच्चों के लिए छुटक्की से पैसे मांगे थे इसी बात पर विवाद हुआ और सभी ने मिलकर उसे जला दिया। उसने साफ कहा था कि उसने खुद आग नहीं लगाई और जल्दी इलाज कराने की गुहार लगाई थी।
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