ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती, धात्री माताओं एवं
कुपोषित बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए उनकी समय पर स्वास्थ्य की जांच एवं
पोषाहार का वितरण किया जाए तथा गर्भवती माताओं को संस्थागत प्रसव के लिए
प्रेरित करें ताकि मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सके।
प्रोजेक्ट
समुदाय द्वारा योजनाओं के मूल्यांकन संबंधी विकास भवन में गुरुवार को
आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीएम रमेश मिश्र ने उक्त बात कही।
कहा कि आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य से संबंधित सभी
प्रशिक्षण गुणवत्तापरक दिए जाए तथा गांव के कुपोषित बच्चों के वजन, लंबाई
आदि का कार्य आंगनबाड़ी कार्यकत्री करें और आशा क्षेत्र की सभी गर्भवती
माताओं का चिन्हांकन करते हुए जांच एवं दवाओं का वितरण समय पर करें।
डीएम
ने प्रोजेक्ट समुदाय के अफसरों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी,
पीएचसी व उपकेंद्रों पर प्रसव, कुपोषण आदि स्वास्थ्य से संबंधित जो भी
कमियां पाईं जाएं और कमियों को दूर करने के उपाय भी एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी
कार्यकत्रियों को बताए जाएं।
सीनियर प्रोजेक्ट आफीसर आलोक वर्मा ने कहा
कि प्रोजेक्ट समुदाय का संचालन ब्लाक कछौना मेें किया जा रहा है और इसमें
सभी सीएचसी पीएचसी एवं स्वास्थ्य उपकेंद्रों का निरीक्षण किया जा रहा है
तथा मिलने वाली कमियों को कैसे दूर किया जाए इसकी जानकारी संबंधित
चिकित्सक, नर्स, एएनएम, आशा व कार्यकत्रियों को दी जा रही है।
बताया कि
एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को गुणवत्तापरक प्रशिक्षण देने को एक
मोबाइल वैन ट्रेनिंग यूनिट के साथ सभी सीएचसी-पीएचसी पर जाएगी और वहीं
उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। डा. कीर्ति कर्मचंदानी ने क हा कि
कछौना में आबादी के सापेक्ष मात्र एक संस्थागत प्रसव केंद्र है, जबकि 24
उपकेंद्र हैं और इन केेंद्रों पर प्रसव की सुविधा मुहैया न होने के कारण भी
संस्थागत प्रसवों में कमी आती है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए आबादी एवं
दूरी के अनुसार संस्थागत प्रसव केंद्रों की स्थापना होनी चाहिए। कार्यशाला
में पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया की डा. सुपर्णा, डा. ईशा, डा. शिवम
गुप्ता, शारदा प्रकाश जौहरी, सुधीर दीक्षित, रमाकांत मौर्य, दीपमाला मिश्रा
आदि मौजूद थे।