हरदोई। परिषदीय स्कूलों के बच्चों की पढ़ने में रुचि बढ़ाने को प्रत्येक स्कूल में बुक क्लब बनाने के निर्देश शासन से दिए हैं। प्रत्येक कक्षा में रीडिंग कार्नर भी बनाए जाएंगे जो छात्र-छात्राओं को पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। शिक्षा विभाग ने क्लब बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास बात ये होगी कि क्लब की जिम्मेदारी बच्चे ही उठाएंगे।
शासन की ओर से आए निर्देशों में कहा गया है कि क्लब में प्रत्येक कक्षा से दो छात्र व दो छात्रओं का चयन होगा। यह क्लब अपने सहपाठियों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही उन्हें पढ़ने के लिए पाठ्यक्रम के अतिरिक्त देश-दुनिया की जानकारी देने वाली पुस्तकें भी दी जाएंगी। वहीं सप्ताह में या माह में इन पुस्तकों पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में प्रधानाचार्य या सहायक अध्यापक के रूप में एक शिक्षक को पुस्तकालय कार्य के लिए नामित किया जाएगा।
जो पुस्तकालय संबंधी सारे काम करेंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि महानिदेशक से आए निर्देशों से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को बता दिया गया है। बताया कि जहां पुस्तकालय के लिए कक्ष न हों, वहां पर रीडिंग कार्नर की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक विद्यालय के पुस्तकालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए आयु अनुरूप, कक्षानुरूप एवं प्रत्येक स्तर की पुस्तकें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि प्रत्येक कक्षा के बच्चे रुचिपूर्ण ढंग से पुस्तकालय का उपयोग कर सकें।
प्रबंध समिति व समुदाय का लिया जाएगा सहयोग
हरदोई। बीएसए ने बताया कि प्रबंध समिति व समुदाय का सहयोग लिया जाएगा। प्रबंध समिति को भी समय समय पर पुस्तकालय को देखकर अपनी राय बताने को कहा जाएगा। मैगजीन आदि भी लगातार अपडेट किए जाने का प्रयास किया जाएगा।
क्या होगा बुक क्लब
- .बुक क्लब प्रत्येक कक्षा के लिए बनाया जाएगा। जिसमें कक्षा से दो बालक व दो बालिकाएं लिए जाएंगे। इनका चयन कक्षा शिक्षक के रूप में किया जाएगा।
.- प्रत्येक तीन माह में बुक क्लब के सदस्य बदल जाएंगे। ताकी धीरे धीरे सभी बच्चों को इस प्रकार के कार्य का अनुभव प्राप्त हो सके।
- यह क्लब बच्चों द्वारा प्राप्त की गई पुस्तकों का व्यौरा रखेंगे। वह ईश्यू रजिस्टर भी तैयार करेंगे।
- बच्चों को प्रोत्साहित करेंगे ताकि वह अधिक से अधिक पुस्तकालय का प्रयेाग करें।
- साप्ताहिक व नवीन गतिविधियां मासिक तौर पर होती रहीं जिससे बच्चों में पठन पाठन के प्रति रूचि बनी रहे।