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- बीमार पिता को डॉक्टर ने दी काला गेहूं खिलाने की सलाह, बेटे ने उगाई फसल
- कोरोना से सेहत के प्रति जागरूक हुए किसान, पहली बार उगाया काला गेहूं
संवाद न्यूज एजेंसी
बेहंदर। एक ओर जहां किसान औषधीय खेती की तरफ बढ़ रहे हैं वहीं, दूसरी ओर स्वस्थ रहने के लिए लाभकारी अनाज भी उगा रहे हैं। जी हां, जिले के बेहंदर ब्लॉक के दो किसानों ने पहली बार काले गेहूं की फसल बोई है। फसल पक कर तैयार है। यह आम गेहूं से अधिक पौष्टिक होता है और मोटापा, तनाव, कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियों की रोकथाम में कारगर है।
राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी राम बिलास ने बताया कि कोरोना के बाद लोग सेहत के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इसके साथ ही किसानों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली गेहूं को उगाने के लिए प्रेरित किया। बताया कि काले गेहूं में प्रोटीन और एंटी ऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। इसमें एंथ्रोसाइनीन की मात्रा साधारण गेहूं से बहुत अधिक होती है। एंथ्रोसाइनीन एक नेचुरल एंटी ऑक्सीडेंट व एंटीबायोटिक है। जो हार्ट अटैक, कैंसर, मधुमेह, मानसिक तनाव, मोटापा, घुटनों का दर्द, एनीमिया, ब्लडप्रेशर जैसे रोगों में काफी कारगर सिद्ध होता है।
इस गेहूं का रंग व स्वाद सामान्य गेहूं से थोड़ा अलग होता है लेकिन, बेहद पौष्टिक है। यह गेहूं जल्दी पच जाता है और नए ऊतक बनाता है। आंतों के इंफेक्शन में भी कारगर है। सेहत के लिए काला गेहूं बहुत ही फायदेमंद है। यह आम गेहूं से अधिक स्वादिष्ट है। किसानों ने काला गेहूं उगाकर अच्छा काम किया है। यह गेहूं सामान्य से अधिक महंगा बिकता है।
इस गेहूं की मांग तेजी से बढ़ रही
अलादादपुर गांव के रहने वाले एमटेक डिग्री हासिल करने वाले किसान नीरज वर्मा ने दो बीघा भूमि में काले गेहूं की फसल बोई। इसके अलावा कासिमपुर गांव के रहने वाले नितिन सिंह ने भी दो बीघा खेत में काले गेहूं की पैदावार की है। आम गेहूं की तरह जैविक विधि से काले गेहूं की पैदावार की है। नीरज वर्मा के मुताबिक 10 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से काला गेहूं (ब्लैक व्हीट) की पैदावार होती है। इसका बीज 40 रुपये प्रति किलो राजकीय कृषि बीज भंडार बेहंदर से खरीदा था। गेहूं बिक्री के लिए आठ हजार रुपये प्रति क्विंटल लखनऊ के व्यापारी अभी से मांग कर रहे हैं।
...तो फिर काले गेहूं की पैदावार शुरू कर दी
किसान नीरज वर्मा बताते हैं कि उनके पिता को दो वर्ष पहले मधुमेह व अन्य बीमारियां हो गईं थीं। लखनऊ दिखाने गए तो डॉक्टर ने दवाओं के अलावा काले गेहूं के आटे की रोटी खिलाने के लिए कहा था। नीरज ने पहले तो आटा इधर-उधर से मंगाया, इसके बाद इस वर्ष दो बीघा में काले गेहूं की पैदावार की है।