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फांसी दिए बगैर भी हो सकती कड़ी सजा : खान

Fri, 04 Sep 2015 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
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दिल्ली की मानवाधिकार कार्यकर्ता शबनम खान ने कहा कि अपराधी को सजा सिर्फ फांसी देकर ही नहीं, बल्कि जिंदा रखकर भी दी सकती है। फांसी देकर उसके जीने के अधिकार को छीना नहीं जाना चाहिए। कहा कि यूपी में मानवाधिकारों के हनन की एक बड़ी वजह जनता का जागरूक नहीं होना है।
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लोहानी में समरीन जैदी के आवास पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि ईमानदारी और सच्चाई की लड़ाई में दिक्कतें आती हैं, पर पराजय नहीं होती। हमें अपने अधिकारों की लड़ाई पूरी निर्भीकता के साथ लड़नी चाहिए। मानवाधिकारों के हनन में सियासत की बड़ी दखलंदाजी पर कहा कि हनन करने वाले अफसरों पर किसी न किसी नेता का हाथ होता है।

उन्होंने यूपी के हालात को शर्मनाक बताते हुए कहा कि यहां पीड़ित पक्ष ही पुलिस से अपनी बात कहने से डरता है। ऐसे में उनमें सुरक्षा की भावना कैसी आ सकती है। फांसी के मुद्दे पर बोलीं कि अपराधी को कठोर सजा जरूरी नहीं फांसी ही देकर दी जाए। उसे जिंदा रख भी सख्त सजाएं दी जा सकती हैं।
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हर व्यक्ति को जीने का अधिकार है, फिर चाहे वह अपराधी ही क्यों न हो। जुर्म करने वाले को सजा जरूर मिलनी चाहिए, पर उसके जीने का अधिकार बाकी रहना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक खामियों को खत्म करने का मानवाधिकारों के प्रति जनजागरण को समय-समय पर कई आयोजन होने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि शीघ्र ही वह यूपी में अभियान शुरू करेंगी, जिसकी शुरुआत हरदोई से होगी। इस मौके पर मतीन साबिर सिद्दीकी, रेहान हैदर, वसी हैदर, जुबैर गाजी आदि मौजूद थे।
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