देश के 10 करोड़ से ज्यादा कामगारों के साथ कंधे से
कंधा मिलाकर बैंककर्मी भी दो सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल
होंगे। मंगलवार को बैंक आफ इंडिया की शहर स्थित शाखा पर बैंकक र्मियों ने
प्रदर्शन कर यह ऐलान कर दिया।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन की स्थायी
इकाई के बैनर तले हुए इस विरोध प्रदर्शन में शहर की विभिन्न बैंकों के
कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी बैंक कर्मियों ने सभी कामकाजी लोगों से
केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी जन विरोधी नीतियों के खिलाफ दो सितंबर की आम
हड़ताल को सफल बनाने की अपील की।
यूनियन के जिला मंत्री आरके पांडे ने
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभा रहे सार्वजनिक क्षेत्र
के उपक्रमों के विनिवेश को रोकने की मांग ठुकरा दी। सरकार ने ट्रेड
यूनियनों की यह भी मांग ठुकरा दी कि बोनस भुगतान से सीलिंग को पूरी तरह
हटाया जाए।
ग्रेच्युटी पर से भी सीलिंग को हटाया जाए और पुरानी स्कीम बहाल
की जाए। संयुक्त मंत्री अजय मेहरोत्रा ने कहा कि सरकार द्वारा श्रम
सुधारों के नाम पर श्रम कानूनों के बदलाव के प्रयास श्रमिक हितों के विरोधी
है। उन्होंने कहा कि ऐसा हो जाने पर 70 फीसदी कामगार श्रम कानूनों के लाभ
से वंचित हो जाएगा।
जिला उपाध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे ने कहा कि बैंक
कार्यों की आउट सोर्सिंग रोकी जाए। कामगार विरोधी श्रम सुधार रोकें जाएं और
जन विरोधी बैंकिंग सुधार भी रोके जाए। सहायक मंत्री आरके मिश्र ने कहा कि
कारपोरेट ऋण चुकता कर्ताओं द्वारा जनता के धन की लूट रोकी जाए तथा बैंक
ऋणों को जानबूझकर अदा न करना फौजदारी अपराध घोषित किया जाए।
यूनियन संगठन
मंत्री वर्षा मेहरोत्रा ने कहा कि सरकार का यह दावा गलत है कि बाजार में
कीमतें कम हो रही हैं। इस मौके पर जिलाध्यक्ष आरसी बाजपेई, सुनील
अवस्थी, टेक बहादुर, बीके पांडे, प्रिया रस्तोगी, मालती, जैनेंद्र, रोचित,
राजकुमार दीक्षित, अवतार सिंह, राजेश कुमार, अनामिका और मुके श आदि मौजूद
थे।