मल्लावां। नगर पालिका के राज्य वित्त के खाते से एक करोड़ 53 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर भविष्य निधि के क्षेत्रीय कार्यालय में जमा कराने के मामले में भारतीय स्टेट बैंक के अफसर बैकफुट पर आ गए हैं। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की तहरीर पुलिस अफसरों तक पहुंंचने और डीएम की फटकार के बाद बैंक ने भविष्य निधि के क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र भेजकर एक करोड़ 53 लाख रुपये वापस मांगे हैं। ऐसे में यह भी स्पष्ट हो गया है कि बैंक के फील्ड अफसर ने मनमानी की थी, जिसकी वजह से बैंक और पालिका के बीच भी तनाव की स्थिति हो गई।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय के वसूली अधिकारी ने नगर पालिका के बैंक खातों को सीज कर दिया था। नौ जून को खाते सीज हुए थे। दरअसल, नगर पालिका पर वर्ष 2011 से 2017 के बीच पीपीएफ के बकाए और जुर्माने का एक करोड़ 66 लाख रुपये देनदारी की परिधि में आता है। रोक लगने के बाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने उच्च न्यायालय में मामला दायर किया साथ ही भविष्य निधि के क्षेत्रीय कार्यालय के अफसरों के सामने भी आपत्ति लगाई। इसी बीच पांच जुलाई को भारतीय स्टेट बैंक की मल्लावां शाखा के फील्ड अफसर अर्पित कामरा ने नगर पालिका के बैंक खाता के संचालकों (ईओ, लेखाकार और अध्यक्ष) को जानकारी दिए बिना ही राज्य वित्त आयोग के खाते में जमा एक करोड़ 53 लाख 63 हजार 181 रुपये का डीडी बनवाकर क्षेत्रीय कार्यालय भविष्य निधि को भुगतान कर दिया था। पूरे मामले का खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसके बाद अधिशासी अधिकारी प्रेमनाथ वर्मा ने फील्ड अफसर के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी थी।
मामला डीएम एमपी सिंह के पास भी पहुंचा था। उन्होंने बैंक अफसरों से नाराजगी जताते हुए पालिका का रुपया वापस दिलाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में भारतीय स्टेट बैंक की मल्लावां शाखा के प्रबंधक ने भविष्य निधि के क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र भेजकर एक करोड़ 53, 63,181 रुपये वापस नगर पालिका के खाते में जमा कराने के लिए कहा है। अधिशासी अधिकारी प्रेम नाथ वर्मा ने बताया कि बैंक की ओर से भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि मिली है। खाता खाली हो जाने से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।