हरदोई। न्यू आशा नगर में विद्युतीकरण न होने से लोग परेशान हैं। यहां बिजली के तार बांस व बल्लियों पर लटक रहे हैं। इसके कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से कई बार विद्युतीकरण की मांग की गई, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
शहर से सटे मोहल्ला आशा नगर के पिछला हिस्सा न्यू आशा नगर के रूप में पहचाना जाता है। पूरे क्षेत्र में लगभग 10 साल पहले आबादी विकसित हो चुकी है, लेकिन अब तक इलाके में विद्युतीकरण नहीं कराया गया है। क्षेत्र में पांच दर्जन से अधिक लोगों ने विद्युत कनेक्शन ले रखे हैं। पोल न लगे होने के कारण तार बांस व बल्लियों पर लटक रहे हैं। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि तार आए दिन टूटते रहते हैं, ऐसे में करंट लगने से कई बार मवेशियों की मौत हो चुकी है। बताया कि वह जनप्रतिनिधियों समेत बिजली विभाग के अधिकारियों से पोल लगवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि विद्युतीकरण कराने के नाम पर अधिकारियों द्वारा इस पर खर्च होने वाली राशि जमा कराने को कहा जा रहा है।
विभाग के पास नहीं है कोई योजना
विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता एनके मिश्रा ने बताया कि विभाग के पास विकसित आबादी, प्लॉटिंग क्षेत्रों में विद्युतीकरण कराने संबंधी कोई योजना नहीं है। ऐसे मामलों में विद्युतीकरण कराने का खर्च या तो कनेक्शन धारकों को स्वयं उठाना होता है या फिर कोई जनप्रतिनिधि अपनी निधि से विद्युतीकरण करा सकता है।
लोगों ने बताई समस्या
- मोहल्ला निवासी शालिनी ने बताया कि विद्युत तार बांस व बल्लियों के सहारे घरों तक लाए गए हैं। तार काफी नीचे लटक रहे हैं, इससे वाहनों में फंस कर आए दिन तार टूटते रहते हैं।
- मंजू शुक्ला ने बताया कि मोहल्ले में बने मकानों से विद्युत लाइन का पोल काफी दूर है। कई बांस व बल्लियां लगाने के बाद घरों तक बिजली पहुंच पा रही है। पोल लग जाने पर लोगों को काफी राहत मिलेगी।
- घनश्याम ने बताया कि मोहल्ले में विद्युतीकरण को लेकर कई बार शिकायत कर ज्ञापन दे चुके हैं। अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जा रहा है। तार टूटने पर कई बार मवेशियों के करंट लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
- यशवंत सिंह ने बताया कि मोहल्ले में बांस व बल्लियों पर तारों का जाल बिछा है। कभी किसी वाहन में फंसकर तार टूट जाते हैं तो कहीं बांस व बल्ली टूट जाती है। ऐसी स्थित में लोगों को अकारण कटौती झेलनी पड़ती है।