हरदोई। पंचायत चुनाव के लिए जारी अनंतिम आरक्षण पर तरह-तरह की आपत्तियां आ रही हैं। सुरसा विकास खंड की ग्राम पंचायत ओदरा नेवलिया में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर वर्ष 1995 में पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी के निर्वाचित होने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि इसी तरह का एक और मामला सामने आ गया है।
सुरसा विकास खंड की ही ग्राम पंचायत सहोरिया बुजुर्ग में वर्ष 1995 में प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, लेकिन यहां भी पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी जीता था। अब इस मामले को उच्च न्यायालय ले जाने की भी तैयारी चल रही है।
जिले की 1306 ग्राम पंचायतों के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण की अनंतिम सूची दो मार्च को जारी की गई थी। अब इस आरक्षण पर आपत्तियां जताई जा रही है। सुरसा विकास खंड की ग्राम पंचायत सहोरिया बुजुर्ग के डेरानाथ ने पंचायत राज विभाग समेत अन्य अधिकारियों से दर्ज कराई आपत्ति में बताया कि वर्ष 1995 में हुए पंचायत चुनाव में सहोरिया बुजुर्ग के प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, लेकिन इस पर पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति निर्वाचित हो गया।
उसका दावा है कि जो व्यक्ति अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित होने पर प्रधान चुना गया था, वही व्यक्ति वर्ष 2015 में सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने पर भी निर्वाचित हुआ।
पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब इस बार के आरक्षण में वर्ष 1995 से अब तक हुए आरक्षण की श्रेणी भी पारदर्शिता बनाए रखने को स्पष्ट कर दी गई। डेरानाथ का कहना है कि जब 1995 का आरक्षण ही गड़बड़ा गया तो आगे के चक्र स्वाभाविक रूप से बिगड़ गए।
जांच के बाद होगी कार्रवाई : डीपीआरओ
जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीश चंद्र ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
आपत्ति का निस्तारण करने के लिए गठित टीम की मौजूदगी में इस आपत्ति के सभी पहलुओं पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्लाक से भी संबंधित ग्राम पंचायत के अभिलेख निकलवाये जा रहे हैं।