हरदोई। पूर्व विधायक आसिफ खां बब्बू की बसपा में वापसी से शाहाबाद में हाथी की चाल मजबूत हो जाएगी। लगातार चौथी बार शाहाबाद नगर पालिका से चेयरमैन और एक बार विधायक रहे बब्बू की क्षेत्र के मुस्लिमों मेें मजबूत पकड़ मानी जाती है। जिला इकाई की रिपोर्ट शाहाबाद से मुस्लिम प्रत्याशी होने की रिपोर्ट और मुस्लिमों पर मजबूत पकड़ने ने ही चार महीने दो दिन बाद बब्बू की बसपा में वापसी का रास्ता साफ किया।
आसिफ खां बब्बू ने अपना राजनीतिक सफर 1995 में शाहाबाद नगर पालिका के चेयरमैन के चुनाव से शुरू किया था। पहले ही चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। अगले चुनाव में फिर वह चेयरमैन बने। वर्ष 2002 के चुनाव में बसपा ने उन्हें शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र से टिकट दे दिया। उस चुनाव में बब्बू 32469 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे थे। वर्ष 2007 के चुनाव में बब्बू हाथी पर सवार होकर फिर मैदान में उतरे और विधानसभा पहुंच गए। इस चुनाव में उन्होंने सपा के बाबू खां को 4006 वोटों से हराया। उन्होंने विधायकी और नपा अध्यक्षी एक साथ चलाई।
प्रदेश में बसपा की सरकार होने से बब्बू की विधानसभा क्षेत्र में खूब तपी। 2012 के चुनाव में बसपा के विरोध में चली आंधी में बब्बू भी उड़ गए। इस चुनाव में बब्बू को 11134 वोटों से करारी शिकस्त मिली। इसके साथ ही बब्बू पर उनकी पार्टी के विरोधी हावी होने लगी। 20 अप्रैल 2016 को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर मायावती ने बब्बू खां को बसपा से बाहर कर दिया। इसके कुछ दिन बाद रामनाथ तिवारी को शाहाबाद का प्रभारी भी घोषित कर दिया गया।
इसी बीच बसपा जिला इकाई ने आंतरिक सर्वे कर एक रिपोर्ट आला कमान को भेजी। इसमें शाहाबाद में मुस्लिम उम्मीदवार होने पर ही लड़ाई में होने की बात कही गई। बब्बू ने इस रिपोर्ट का बखूबी फायदा उठाया और पार्टी सुप्रीमो के माध्यम से मायावती तक पहुंचे और अपनी बात मजबूती से रखी। पिछले 10 दिन से वह लखनऊ मेें ही डेरा डाले थे। मायावती से 21 अगस्त को लखनऊ में उनकी भेंट हुई और पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हो गया। बब्बू की वापसी से शाहाबाद में बसपा की स्थिति मजबूत होगी।