जिले में भी मानसून ने जून माह को बेहद हल्के में
चलता कर दिया। आलम यह रहा कि खरीफ फसलों के लिए लागू औसत वर्षा मानक के
सापेक्ष जून में 24 मिमी बारिश कम हुई, जिससे अपेक्षानुसार झमाझम बारिश के
सपने तो टूटे ही, साथ ही औसत वर्षा के मानक अनुसार भी बारिश न हो सकी।
यही
कारण है कि जिले में खरीफ फसलों के लिए निर्धारित लक्ष्य 2,48,253
हेक्टेयर के सापेक्ष अभी तक करीब 12 प्रतिशत क्षेत्रफल में ही बुआई और
रोपाई हो सकी है। कृषि विभाग के अफसर भी मानते हैं कि जिले में जून में
मानसून कमजोर रहा, जिससे किसानों को अब निजी संसाधनों से सिंचाई की
व्यवस्था कर खरीफ की फसलों की बुआई और रोपाई के साथ खेतों की जुताई करनी
पड़ रही है।
अगर जुलाई में भी मानसून ने साथ न दिया तो फिर किसानों को
दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। ज्ञात हो कि जिले में मानसून की दस्तक काफी
निराशाजनक ढंग से हुई थी। जून में प्री-मानसून और मानसून के साथ अभी तक
करीब 60 मिमी बारिश हुई है, जो कि खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त नहीं है।
जून
में मानसून की दस्तक के साथ 100 से 200 मिमी बारिश की उम्मीदें पूरी नहीं
हुई। औसत वर्षा का मानक 84 मिमी का आंकड़ा भी पार न हो सका। ऐसे में अगर
जुलाई में भरपूर वर्षा न हुई तो खरीफ फसलें प्रभावित होगी और तब किसानों को
कम पानी वाली फसलों के लिए तैयार रहना होगा।
इस बाबत उप-कृषि निदेशक बृजेश
चंद्रा ने बताया कि मानसून ने जून में अपेक्षाकृत बारिश नहीं दी। 15 जुलाई
तक 100 से 200 मिमी पानी बरस जाता है तो धान की फसल के लिए बेहद अच्छा
रहेगा और यदि पानी कम बरसता है तो फिर फसलों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता
है।
खासतौर से धान की रोपाई पर खराब असर पड़ेगा। यही कारण है कि किसान इस
ओर अब निजी संसाधनों से सिंचाई करने की ओर व्यवस्था में लगे हुए हैं।