हरदोई। जिले में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा पाना टेढ़ी खीर से कम नहीं है। निजी हाथों में टेस्ट प्रक्रिया और बिचौलियों के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण आवेदकों को लाइसेंस बनवाने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। तमाम आवेदकों को मनमानी धनराशि भी अदा करनी पड़ती है। इसके बावजूद सेंसरयुक्त ट्रैक पर कुशल चालक फेल कर दिए जाते हैं।
नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए सबसे पहले जनसेवा केंद्र पर लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है। इसका ऑनलाइन ही टेस्ट होता है। लर्निंग लाइसेंस बनने के बाद आवेदक एक महीने बाद स्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। स्थायी लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन और फीस जमा करने के बाद एआरटीओ कार्यालय में बायोमीट्रिक करानी पड़ती है फिर प्रत्यायन चालन प्रशिक्षण और परीक्षण केंद्र (एडीटीसी सेंटर) पर टेस्ट देना होता है। यही से आवेदकों की परेशानी शुरू हो जाती है। सेंसरयुक्त ट्रैक पर चालकों को प्रशिक्षण के लिए कई बार परेशान होना पड़ता है। आवेदकों को कई बार चक्कर काटने पड़ते हैं और बिना बिचौलियों के स्थायी लाइसेंस नहीं बन पाता है।
केस-1- आजादनगर निवासी रवि कुमार ने स्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। कई चरणों से गुजरना पड़ा। इससे पहले सेंटर के बाहर काफी देर प्रतीक्षा करने के बाद अंदर बुलाया गया। बाहर बैठने की भी उचित व्यवस्था नहीं है।
केस-2- हरियावां के अनूप शुक्ला ने बताया कि स्थायी लाइसेंस बनवाने गए। काफी दिनों से भटक रहे लेकिन काम नहीं हो पाया। बिचौलिए ने सात हजार रुपये मांगे हैं।
एडीटीसी में पूरे ट्रैक पर कैमरे लगे हैं। वहां तय समय में कई बातों का ध्यान रखते हुए वाहन सफलतापूर्वक चलाना होता है। इसमें कई आवेदक अनावश्यक रूप से संयम खो देते हैं। बिचौलियों के चक्कर में न पड़कर सीधे विभाग से काम कराएं तो दिक्कत नहीं आएगी। -अरविंद कुमार सिंह
एआरटीओ, हरदोई