हरपालपुर (हरदोई)। अरवल थाना क्षेत्र के ग्राम लालपुर में जुआ खेलने की शिकायत के बाद किसान की लाठियों से पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला शुक्रवार सुबह गरमा गया। परिजनों ने एफआईआर में दो और लोगों के नाम बढ़ाने और मुआवजे की मांग की। ग्रामीणों के साथ हरपालपुर-कन्नौज को जोड़ने वाले कुसुमखोर पुल के निकट शव रखकर जाम लगा दिया। अरवल पुलिस ने बल प्रयोग करने की कोशिश की तो ग्रामीण पुलिस से भिड़ गए। एसडीएम और सीओ ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। इस बीच किसी ने पत्थर मारकर पुलिस जीप का शीशा भी तोड़ दिया। लगभग दो घंटे बाद स्थिति सामान्य हुई।
ग्राम लालपुर निवासी रामपाल (65) के घर पर बुधवार रात कुछ लोगों ने हमला बोल दिया था। घटना में रामपाल की मौत हो गई थी, जबकि उसके पुत्र अवधेश (35), प्रदीप (26) और पुत्री रेखा (30) घायल हो गए थे। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया था। शुक्रवार सुबह परिजनों ने कुसुमखोर पुल के निकट शव रख दिया। सूचना पर पहुंची अरवल पुलिस ने जाम खुलवाने के लिए बल प्रयोग किया तो ग्रामीणों से गुत्थम-गुत्था हो गई। इस दौरान चले ईंट पत्थर से अरवल थाने की जीप भी क्षतिग्रस्त हो गई। सीओ हरपालपुर राकेश वशिष्ठ और एसडीएम सवायजपुर कपिलदेव यादव मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों व परिजनों से बात की। सीओ ने बताया कि परशुराम और शेर सिंह पुत्रगण सुंदरलाल का नाम एफआईआर में बढ़वाने के लिए दिया गया है। एसडीएम ने किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाने को भी आश्वस्त किया है। इसके बाद लोग शांत हुए।
पुलिस ने पहले बरती ढिलाई, लोगों का आक्रोश भी न भांप पाई
हरदोई। घर के निकट जुआ खेले जाने की शिकायत को गंभीरता से न लेने का आरोप अरवल पुलिस पर पहले से है। अब शुक्रवार को भी जिम्मेदार ग्रामीणों और परिजनों का आक्रोश नहीं भांप सके। घटनाक्रम को हल्के में लेना पुलिस के लिए भारी पड़ गया। अब पुलिस जाम लगाने और हंगामा करने वालों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी में है।
अरवल थाना क्षेत्र के ग्राम लालपुर निवासी निवासी रामपाल (65) के घर के निकट जुआ खेला जा रहा था। इसकी शिकायत थाने में कर रामपाल ने जुआ बंद कराने की फरियाद भी की थी। पुत्र अवधेश ने बताया कि थाने में तैनात एक सिपाही ने जुआ बंद करवाने के लिए 500 रुपये भी लिए थे। जुआ तो बंद नहीं हुआ लेकिन शिकायत से नाराज आरोपियों ने हमला कर रामपाल की जान ले ली और परिजनों को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। शुक्रवार सुबह जब अंतिम संस्कार के लिए शव जा रहा था, तो भी मामले को देखते हुए अरवल पुलिस ने सतर्कता नहीं बरती। नतीजा आक्रोश के रूप में सामने आया और हालात बिगड़ गए। इसके बाद भी पुलिस ने ऐसे मौके पर संवेदनशील होने की जगह सख्त रुख अपनाया। उच्चाधिकारियों को सूचना तब दी जब स्थिति बेकाबू हो गई। सांडी, बिलग्राम, बेहटागोकुल, हरपालपुर सहित छह थानों का पुलिस बल बुलाकर स्थिति संभाली गई। मृतक के पुत्र अवधेश ने आरोप लगाया कि दो नामों को एफआईआर में शामिल नहीं किया गया। हालांकि अरवल एसओ जनार्दन सिंह कहते हैं कि तहरीर में जितने लोगों के नाम थे, उन सभी को शामिल किया गया था। दो नाम और बढ़ाए गए हैं।
पुलिस ने नहीं किया लाठीचार्ज : एसओ
एसओ अरवल जनार्दन सिंह ने पुलिस के बल प्रयोग करने की बात को नकार दिया। कहा कि जाम लगाए लोगों को समझाने के लिए पुलिस गई, तो ग्रामीणों और मृतक के परिजन पुलिस पर हमलावर हो गए। एसओ ने बताया कि उपद्रवियों को चिह्नित किया जा रहा है और इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाएगी। एसओ ने कहा कि हंगामा करने वाले लोग राजनीति से प्रेरित हैं।