हरदोई। आधुनिकता ने गौरैया को को गायब कर दिया है। शहर तो शहर अब गांव में भी गौरैया नहीं दिखती है। जंगल के खात्मे के साथ गौरैया का घरौंदा उनसे छीन लिया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व आल इंडिया मेडिकल साइंस का हवाला देकर कृ षि विभाग व पशु पालन विभाग के अधिकारियाें का कहना है कि रिपोर्ट में वनस्पति व पशु पक्षियों की 200 से अधिक प्रजातियां लुप्त हो रही है। इन्हीं में से एक गौरैया भी है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अशोक कुमार यादव ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व आल इंडिया मेडिकल साइंस की ओर से कराए गए सर्वे में पाया गया कि पालिथीन की वजह से भूमि के तत्व प्रभावित हुए हैं। ऐसे में नए पौधे विकसित नहीं हुए और लोग जंगल को खत्म करते जा रहे हैं। जंगल के खत्म होने से घरेलू चिड़िया गौरैया भी खत्म हो रही है।
रेडिएशन घोंट रही नन्हें पक्षियों की जान
हरदोई। उप वन रेंजर रत्नेश श्रीवास्तव ने बताया कि बांबे नेचर हिस्ट्री सोसाइटी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली किरणें पक्षियों का रास्ता भी बदल देते हैं। टावरों से निकलने वाली तरंगों की ओवर लैपिंग के कारण मेहमान पक्षी कई बार गलत जगह उतर जाते हैं। इन तरंगों के चलते न सिर्फ उनका व्यवहार बदल रहा है बल्कि प्रजनन एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता भी नष्ट होती जा रही है। टावरों से निकलती इलेक्ट्रोमैगभनेटिक किरणों से गौरैया के विलुप्त होने के संकेत भी मिल रहे हैं।