हरदोई। वाराणसी में हुए हादसे में मृत रामबेटी का शव रविवार को अल्लीपुर गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। एंबुलेंस से आए शव को जिले की सीमा से देहात कोतवाली पुलिस ने गांव तक पहुंचाया। अंतिम संस्कार तक पुलिस गांव में ही मौजूद रही लेकिन तहसील का कोई अधिकारी और लेखपाल शाम तक गांव नहीं पहुंचा।
देहात कोतवाली के अल्लीपुर गांव से करीब 25 लोग वाराणसी में जय गुरुदेव धर्म प्रचार संस्था के सत्संग में शामिल होने गए थे। रामपाल की पत्नी रामबेटी (60), बेटा हरिनाथ (45),चचेराभाई मंगू, उसकी पत्नी, सुरेंद्र, उसकी पत्नी के अलावा गांव के 21 लोग गए थे।
रामबेटे का परिवार और पड़ोसी लोडर से गए थे जबकि अन्य लोग ट्रेन से वाराणसी पहुंचे थे। हरिनाथ ने बताया कि पुल पर बहुत भीड़ थी। हम लोग दूसरे छोर पर पहुंचने ही वाले थे, तभी लोग भागने लगे। मैं और मां भी गिर गए।
मैं तो जैसे तैसे उठ गया लेकिन मां नहीं उठ पाई। सैकड़ों लोग उसके ऊपर से निकल गए। इससे मां की मौत हो गई। करीब एक घंटे बाद पुलिस पहुंची और लोगों को अस्पताल पहुंचाया। हरिनाथ और मंगू भी मामूली रूप से घायल हो गए।
गांव के अन्य लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। परिजनों से उनकी फोन पर बात हुई है। रविवार सुबह लगभग 10 बजे रामबेटी का शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। लौट कर आए लोगों से हर कोई हादसे के बारे में जानना चाहता था। दोपहर बाद रामबेटी का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
गांव निवासी खुशीराम (35) ने ट्रेन से रिजर्वेशन कराया था। उसके साथ मोहल्ला के आठ लेाग गए थे। खुशीराम की भतीजी सीमा ने बताया कि शनिवार चार बजे उसको हादसे की जानकारी टीवी पर न्यूज चैनल पर से हुई। इससे घर के लोग बदहवास हो गए। इसके बाद चाचा को फ ोन किया तो उन्होंने सकुशल होना बताया। खुशीराम के साथ लालू भी गया था। हादसे के बाद लालू की मां रामरानी ने उसको फोन लगाकर हाल लिया।
अल्लीपुर गांव निवासी सावित्री (45) पत्नी गौरीशंकर क ा बाबा जय गुरदेव के कार्यक्रमों में पिछले कई सालों से आना जाना रहा है। इस बार वह साथ में अपने भाई संतोष को भी ले गई थी। हादसे की सूचना के बाद लगभग छह बजे गौरीशंकर ने सावित्री को फोन लगाया लेकिन कई बार फोन करने के बाद भी उसका रिसीव नहीं हुआ। इससे वह बदहवास हो गया, लगभग तीस मिनट बाद सावित्री ने फोन किया। गौरीशंकर ने जब फोन रिसीव न करने की वजह जानी तो उसने सत्संग में होने की बात कही।
वाराणसी में जय गुरदेव धर्र्म प्रचार संस्था के सतसंग में शामिल होने के लिए जिले से लगभग पांच सौ लोग गए थे। जिले से छह निजी बसें बुक कराई गई थीं। जिसमें कन्हईपुरवा, बिलग्राम चुंगी, सांडी, हरपालपुर, गोपामऊ, लोनार, कौंढ़ा और दुबघटिया से बसों में सवार होकर लोग गए थे। इसके साथ ही लोग लोडर, निजी वाहन व ट्रेनों से भी वाराणसी गए थे।
जयगुरूदेव की सत्संग में बनारस में मची भगदड़ में मौत के मुंह समाई अल्लीपुर गांव की महिला के परिजनाें के प्रति सदर तहसील प्रशासन की संवेदनहीनता दिखाई पड़ी । मृतका का शव उसके गांव अल्लीपुर (बावन ब्लाक ) शनिवार की रात ही आ गया था मगर तहसील प्रशासन की ओर से रविवार की दोपहर तक कोई झांकने नहीं पहुंचा । हल्का लेखपाल तक न आने को लेकर लोगों में नाराजगी रही । एडीएम केबी अग्रवाल ने कहा कि वे इस मामले में नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित कराएंगे ।