कसबे में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन करते हुए
स्वामी सुरेशानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मानव सदैव निज कल्याण के प्रयास
में रहता है, जबकि संसार नश्वर है।
कहा कि जितना प्रेम और प्रयास वह इस
नश्वर संसार के लिए मानव करता है, उतना प्रेम और प्रयास ईश्वर की भक्ति
करने में कर ले तो उसका कल्याण हो जाए। उन्होंने कहा कि सभी धर्म आपसी
सद्भाव और प्रेेम की शिक्षा देते हैं, क्योंकि सबका मालिक एक है तो फिर
कैसी दूरी।
उन्होंने कहा कि राग, द्वेष, बैर, बेईमानी जैसी बुराइयों को
त्याग कर सद्भाव को अपनाना चाहिए। उन्होंने कई श्लोकों का वर्णन भावार्थ
समेत समझाते हुए श्रद्धालुओं को भावविह्वल कर दिया। इस मौके पर आयोजक
रेंद्र पाल सिंह, शीतू सिंह ने आरती करने के बाद प्रसाद का वितरण किया। इस
मौके अल्ला रक्खा, शमशेर, पिंकू, डा. प्रेम शर्मा आदि मौजूद थे।