सरकार को चकमा देकर गैर राज्य की शराब तस्करी कर यूपी
में बेचने के काले धंधे में पिहानी आसपास के जिलों में केंद्र बना हुआ है।
एक जनप्रतिनिधि समेत इस कारोबार से जुड़े लोगों पर आबकारी विभाग की निगाह
है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न हो पाने से यह कारोबार यहां लंबे
समय से फल फूल रहा था।
चंद माह पहले राष्ट्रीय राजमार्ग से बरामद शराब
के भारी जखीरे में पुलिस चार्जशीट लगा चुकी है। वहीं लखीमपुर खीरी क्षेत्र
में ऐसे ही मामले के लिए एक ब्लाक प्रमुख पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
पिहानी इस धंधे का केंद्र है। हालिया कार्रवाई से प्रमुख खेमे में खलबली
है।
इससे पहले 28 सितंबर 14 को राष्ट्रीय राजमार्ग से एक ट्रक और गोदाम से
75 लाख रुपये की हरियाणा और चंडीगढ़ से तस्करी कर क्षेत्र में लाई जा रही
शराब बरामद की थी। हालांकि, इसमें असली मुजरिम बच गए थे और चालक हरविंदर
निवासी यमुनानगर हरियाणा व गोदाम मालिक रवि पुत्र बटेश्वर के विरुद्ध
मुकदमा कायम हुआ था।
कोतवाल लालता प्रसाद साहू के अनुसार इस मामले मेें
हरदोई में कार्रवाई से बचे ब्लाक प्रमुख के खिलाफ लखीमपुर में ऐसी ही
बरामदगी पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। अब 14 जनवरी 15 में हुई इस
कार्रवाई ने प्रमुख को खुल कर सामने ला खड़ा किया है। पूर्व में 75 लाख की
शराब बरामदगी के मामले में जानकार बताते है कि इसकी संबंधित सूबों में कीमत
बीस से पच्चीस लाख रुपये है और वह यहां यूपी में आकर 75 लाख रुपये की हो
जाती है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता कि शराब तस्करी के खेल ने माफियाओं को
कितना लाभ हो रहा है। इस घटना से एक तथ्य यह भी सामने आया था कि शराब
माफियाओं के पास नकली होलोग्राम आदि हैं और वह विदेशी मदिरा की तस्करी के
बाद इस पर अपने नकली लेबल आदि लगाकर इन्हें यूपी में फरोख्त कर आबकारी
विभाग को करोड़ों का चूना लगाते हैं।
पिहानी ही नहीं, पिहानी में तस्करी
कर रखी जाने वाली शराब आसपास के जिलों तक सप्लाई होती है। बुधवार को हुई
कार्रवाई और प्रमुख के शराब रखने के संभावित ठिकानों पर हुई ताबड़तोड़
छापामारी से इस कारोबार से जुड़े लोगों में बेचैनी है। सूत्रों की मानें तो
आबकारी विभाग की निगाह अभी कसबा और देहात क्षेत्र में शराब के ठिकानों पर
है।