हिंदू धर्म के सभी मांगलिक कार्यक्र म शुभ मुहूर्त में ही करने का प्रावधान है। विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, सगाई आदि। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचांग के हिसाब से कुछ दिन ऐसे भी होते है कि जिनमें पत्रा को देखे बिना कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं। उन्हीं में से एक है बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी अक्षय तृतीया।
बहरहाल 21 अप्रैल को इस स्वयं सिद्ध मुहूर्त को लेकर जिले में काफी उत्साह है। मांगलिक कार्यक्रमों से लेकर साधना व तप आदि को सिद्ध करने के लिए बाजारों में खासी तैयारी है।
अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जानते हैं। ज्योतिष शास्त्रों के हिसाब से अक्षय का अर्थ है कि कभी न क्षय होने वाला। यानी अक्षय तृतीया दिवस का आशय इससे भी निकाला जा सकता है कि ऐसा दिवस जिसका कभी भी क्षय न हो।
इस दिन कोई भी साधना, हवन, जप व तप हो उसका फल जातकों को अवश्य मिलता है। जानकारों का कहना है कि स्वयं सिद्ध मुहूर्त होने के नाते भले ही इस दिन कोई क्षय नहीं होता बल्कि अन्य किसी दिन हो सकता है कि साधक को उसकी साधना का फल न मिल पाए।
लेकिन इस दिन फल न मिलने की संभावना न के बराबर होती है। इस दिन घर की गृह लक्ष्मी अपने परिवार क ी खुशियों के लिए पुण्य आत्माओं व पूर्वजों का पूजन करती है। इस दिन लक्ष्मी जी को घर बुलाने केलिए पूजन आदि होता है। इसके अलावा मांगलिक कार्यक्रमों की होड़ लगती है।
वैवाहिक कार्यक्रमों से लेकर हवन पूजन, मुंडन, गृह प्रवेश आदि को लेकर भी आयोजन होते है। फिलहाल इन्हीं आयोजनों को देखते हुए इन दिनों जिले के बाजार ग्राहकों से पटे है। ज्योतिष के जानकार उमाकांत अवस्थी का कहना है कि इस दिन किया गया दान, पूजन, साधना सब पूर्ण होता है। इसलिए भगवान को मानने वालों में इसे लेकर काफी हर्ष है।
भारतीय कालगणना के अनुसार चार स्वयं सिद्ध अभिजीत मुहूर्तो में से एक है अक्षय तृतीया। अक्षय तृतीया यानी आखा जीत को मिलाकर चार ऐसे मुहूर्त है जिनमें कोई भी मांगलिक कार्य शुभ माने जाते है। इनमें चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, दशहरा व दीपावली को भी अभिजीत मुहूर्तों में शामिल किया जाता है।