जिले में संचालित हो रही चार चीनी मिलों पर किसानों
का अभी भी करीब 96 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। यह आलम तब है,
जब जून 15 में एक याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीमकोर्ट ने 15 जुलाई तक शत
प्रतिशत भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी चीनी मिलों ने
किसानों को शत प्रतिशत भुगतान नहीं किया गया है।
उधर, बीते तीन वर्षों
से किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर हो रही परेशानियों का ही नतीजा
माना जाएगा, जिससे 52 हजार हेक्टेयर से घटकर 35 हजार हेक्टेयर के करीब आ
गया है। गन्ना विभाग के अफसर भी मानते हैं कि किसानों का रुझान गन्ने की
खेती को लेकर कम हो रहा, जिससे बीते इन तीन वर्षों मेें 32 फीसदी गन्ना
क्षेत्रफल घटा है।
ज्ञात हो कि जिले के किसानों की परेशानियां कम नहीं हो
पा रही है। सूखा और अतिवृष्टि से जूझ चुके किसान पहले से ही परेशान है और
रही सही कसर चीनी मिलें पूरी कर रही हैं। नियमानुसार गन्ना मूल्य का भुगतान
गन्ने की तौल होने के 15 दिनों के भीतर हो जाना चाहिए।
पर, यहां तो
चीनी मिलों का पेराई सत्र समाप्त हुए 3 माह से ज्यादा का समय हो गया और
किसानों का जिले की चारों चीनी मिलों पर करोड़ों का गन्ना मूल्य भुगतान
बकाया चल रहा है। गन्ना विभाग के अनुसार चारों चीनी मिलों पर करीब 96 बकाया
है।
ज्ञात हो कि जून 15 में एक याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीमकोर्ट के
निर्देशानुसार सभी चीनी मिलों को कुल बकाया गन्ना भुगतान में 25 फीसदी
भुगतान 15 जून तक और शेष 75 फीसदी भुगतान 15 जुलाई तक किसानों को करना था,
पर इसके बाद भी शत प्रतिशत भुगतान नहीं हो सका है।