त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले पायदान पर ही जिले
के हजारों मतदाताओं को मतदाता सूची में जगह न देकर जहां जिले की प्रशासनिक
व्यवस्थाएं औंधे मुंह गिरती नजर आई, वहीं अब आयोग भी इन कटे नामों को
जोड़ने के लिए संजीदा नजर नहीं आ रहा है।
16 सितंबर से जारी शेड्यूल पर
भी कार्य शुरू नहीं हो सका, वहीं अब जिम्मेदार अधिसूचना जारी होने पर 21
सितंबर से आयोग की साइट खुलने की बात कहने लगे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं
कि जिले में हर ग्राम पंचायत से दर्जनों से लेकर सैकड़ों नामों का कटना कोई
छोटी गलती नहीं है।
इसके पीछे स्थानीय लोगों का बीएलओ पर सीधेे तौर पर
दबाव होना बताया जा रहा है। या फिर अन्य कारण भी हो सकते हैं, पर कुल
मिलाकर व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह जरूर लगा है। कहने वाले यहां तक कहने से
नहीं चूक रहे कि जब मतदाता बनाने में ही प्रशासनिक मशीनरी निष्पक्ष नहीं
दिखी, तो आगे क्या हाल होने वाला है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
बहरहाल बड़े स्तर पर आए शिकायती पत्रों व प्रदर्शनों के बाद आयोग ने
हर जिले को मौका देते हुए 16 से 25 सितंबर के मध्य वेबसाइट खुलने और तब
उसमें नामों को फीड कराने का मौका देने की बात कही गई थी, पर 16 सितंबर से
वेबसाइट नहीं खुली।
अब अधिसूचना जारी होने के दिन यानी 21 सितंबर से ही
आयोग की वेबसाइट खुलने की बात कही जाने लगी है। इस बाबत सहायक निर्वाचन
अधिकारी प्रेम नारायन मिश्र ने बताया कि अब 21 सितंबर से वेबसाइट खुलने की
जानकारी मिली है। इसी के बाद नया शेड्यूल जारी होने की उम्मीद है।