सिनेमा चौराहे पर एचडीएफसी बैंक के एटीएम के बाहर लाइन खडे़ लोग
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हरदोई की ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की 53 बैंक शाखाओं में मंगलवार को भी पैसा नहीं पहुंचा। पैसा न पहुंचने से लेनदेन पूरी तरह से प्रभावित रहा। इससे ग्राहक दिनभर परेशान रहे। वहीं एसबीआई, पीएनबी, यूनियन बैंक, एचडीएफसी समेत अन्य बैंकों में पैसा होने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली। एसबीआई, एचडीएफसी को छोड़कर आईसीआईसीआई, एक्सेस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी आदि के एटीएम नहीं चलने से लोगों को दिक्कत हुईं।
जिले भर में ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की 68 शाखाएं है। इन शाखाओं को मंगलवार की सुबह बैंक ऑफ इंडिया केरेंसी चेस्ट की ओर से 50 लाख रुपये मिले। जिसे शहर समेत 15 शाखाओं में भेजा गया। जबकि जिले भर की 53 शाखाओं में पिछले एक सप्ताह से पैसा न होने से यहां के ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक जितेंद्र कुमार ने बताया कि बैंक ऑफ इंडिया से उन्हें काफी कम रुपया मिलता है। बैंक की अधिक शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में है। पैसा न मिलने से ग्रामीण परेशान है, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते। बैंक में पैसे का लेनदेन पूरी तरह से प्रभावित है। उधर एसबीआई की मुख्य शाखा समेत 50 बैंक शाखाओं में पैसा होने से ग्राहकों की भीड़ बैंक में सुबह से लगी रही। एसबीआई की मुख्य शाखा की बैंक में लोगों को जरूरत के हिसाब से पैसा मिला, लेकिन अन्य शाखाओं में 5-5 हजार रुपये की लोगों को दिए गए। एमजी मार्ग पर पीएनबी, यूनियन बैंक की शाखाओं में दोपहर बाद पैसा खत्म हो गया। इससे ग्राहकों को दिक्कत हुई। सिनेमा रोड पर ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त बैंक में लोगों को 6-6 हजार रुपये दिए गए। सिनेमा चौराहे पर एचडीएफसी बैंक में लोगों को जरूरत के हिसाब से मिले। बैंक से पैसा निकलने से लोगों को राहत मिली। आईसीआईसीआई, एक्सेस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी आदि के एटीएम न चलने से लोगों को दिक्कत हुई।
दूध कारोबार पर पड़ रहा असर
एचडीएफसी बैंक से पैसा निकालने आए हरियावां ब्लाक के ग्राम कल्याणी निवासी आबिद ने बताया कि गांव में ही दूध डेयरी का एक सेंटर चलाते हैं। कई गांव से आने वाले दूधिए से फुटकर दूध खरीदकर डेयरी को भेज देते हैं। नियमित रूप से 5-6 हजार रुपये का उनके यहां पर दूध एकत्र होता है। डेयरी की ओर से उनके खाते में सभी का पैसा भेज दिया जाता है, लेकिन अलग-अलग दूधियों को दूध के रुपये का भुगतान करना उनके लिए मुश्किल है। इससे दूध के कारोबार पर असर पड़ रहा है।