आजादी के 68 साल पूरे होने के बावजूद जिले में समुचित विकास होता नजर नहीं आ
रहा। आलम यह है कि कहीं पुल नहीं बने, तो कहीं पर सड़के दलदल में तब्दील
है। उद्योग के नाम पर न तो कोई ऐसी इंडस्ट्री खुल पा रही है, जिससे युवाओं
को रोजगार मिले। न ही उच्च शिक्षा के लिए अभी तक कोई संस्थान खुल सका।
हैरत
की बात है कि आज भी जिलेवासियों को शहरोें जैसी सुविधाएं नसीब नहीं हो रही
हैं। मल्लावां क्षेत्र में करवा गांव से गुजरी कल्याणी नदी आज भी विकास के
दावों को आईना दिखा रही है। इस नदी पर अब तक पुल न बनने से पूरनपुर,
कुतुबापुर, झरियनपुरवा, हरैया, प्यारेपुर, हजरतपुर, नेकपुर, रामपुर,
मंसूरपुर, करियनपुर समेत एक सैकड़ा गांवों के बाशिंदे किसी तरह नाव पर सवार
होकर नदी पार कर नगर आते हैं।
बाढ़ के दौरान यह आवागमन भी बंद हो जाता।
इतना ही नहीं वर्ष 10 से अब तक चार बार स्कूली बच्चों से भी नाव नदी में
पलट गई। बच्चों के बस्ते बह गए, पर वह बाल बाल बचे। इस पुल को बनवाने को
लेकर हर बार चुनाव में नेताओं ने वादे किए। बाद में मुड़कर नहीं देखा।
इतना
ही नहीं सत्ताधारी दल के नेताओं ने भी इस ओर मुड़कर नहीं देखा, जिसका
खामियाजा आज भी यहां के बाशिंदों को भुगतना पड़ रहा है। इधर, सवायजपुर
क्षेत्र के अर्जुनपुर गांव तक जाने को नाव का ही सहारा है। बाढ़ में
फर्रुखाबाद होकर इस गांव तक लोग पहुंचते हैं, जिससे अधिकांश गांव के लोगों
को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
जिले की पांच तहसीलों के प्रमुख
मुद्दों पर फिर जनप्रतिनिधियों का ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया जा
रहा है। उधर, हैरानी की बात यह है कि साल दर साल विकास की दुहाई दी जाती
है, पर रोना यह है कि शहर में बालिकाओं के स्नातक को लेकर कला वर्ग के लिए
मात्र एक कालेज है, जबकि दो इंटर कालेज है, जो विकास की पोल खोलने में काफी
है। विज्ञान वर्ग में प्रवेश को लेकर सह शिक्षा वाले कालेजों में मारामारी
होती है।