हरदोई। एंबुलेंस चालक सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क ही मरीज व उनके तीमारदारों से वसूल सकेंगें।
अधिक किराया लेने पर संबंधित एंबुलेंस चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एआरटीओ की ओर से एंबुलेंस की जांच शुरू की जाएगी।
सरकारी एंबुलेंस के अलावा जिले में विभिन्न अस्पतालों से संबद्ध एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। एंबुलेंस संचालन के लिए उसका किसी भी अस्पताल से संबद्धीकरण आवश्यक है और वह उसी अस्पताल के परिक्षेत्र से संचालित हो सकती हैं। इसके अलावा सरकार की ओर निजी एंबुलेंस का किराया भी श्रेणीवार निर्धारित किया गया है।
जिले में 344 एंबुलेंस एआरटीओ में पंजीकृत हैं। इनमें से 135 सरकारी और शेष निजी एंबुलेंस हैं। इन एंबुलेंस को किसी न किसी अस्पताल व नर्सिंगहोम से संबद्ध दिखाया गया है। मगर अधिकांश एबुलेंस जिला अस्पताल के आसपास ही नजर आती हैं और मरीज व तीमारदारों से मनमाना शुल्क वसूल रही है। जबकि शासन की ओर से एंबुलेंस का किराया निर्धारित है।
जिसके अनुसार टाइप ए श्रेणी की एबुंलेंस प्रथम 10 किलोमीटर के लिए 500 रुपये और उसके ऊपर 10 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया ले सकती हैं।
टाइप बी श्रेणी जिसमें मारूति, ओमनी, टाटा मैजिक, मारूती इको ही है। वह प्रथम 10 किलोमीटर तक 1000 रुपये और उसके बाद 20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया ले सकती हैं। टाइप सी लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में प्रथम 10 किलोमीटर तक 15 सौ रुपये और उसके ऊपर 25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से और टाइप डी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस प्रथम 10 किलोमीटर तक 2000 रुपये और उससे ऊपर 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया प्राप्त कर सकती हैं।
एआरटीओ प्रशासन संजीव कुमार सिंह ने बताया कि एंबुलेंस के किराए की रसीद अस्पताल की ओर से काटी जानी चाहिए। सभी एबुंलेंस की आकस्मिक जांच कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत 46 एंबुलेंस की लाइफ पूरी हो चुकी है। इस संबंध में एआरटीओ की ओर से स्वास्थ्य विभाग को ऐसी सभी एंबुलेंस का प्रयोग न करने और उनकाे स्क्रैप कराने के लिए पत्र जारी किया गया है।