प्रदेश में सपुस्तक परीक्षा प्रणाली लागू करने के फैसले के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने गुरुवार को जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। परिषद के पदाधिकारी व सदस्यों ने सूबे में उच्च शिक्षा की स्थिति दयनीय होने पर रोष व्यक्त किया और सुधार के लिए राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक उमापति मिश्र के नेतृत्व में सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था के व्यापारीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिला संयोजक ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति दयनीय है। प्रदेश सरकार ने माध्यमिक शिक्षा में सपुस्तक परीक्षा प्रणाली को लागू करने का फैसला किया है जिसे रोका जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों में प्रवेश की समस्या बनी रहती है, जिसका स्थायी समाधान हो।
पाठ्यक्रम में सालों से परिवर्तन नहीं हुआ है, समिति का निर्धारण किया जाए। प्रदेश में शोध शिक्षा की स्थिति को सुधारने के लिए शोध छात्रों को नियमित रूप से 10 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति दी जाए। वर्ष 2012 में शोध छात्रों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिया जाए। उच्च शिक्षण संस्थाओं के लिए शैक्षिक कैलेंडर बने। विभाग संगठन मंत्री राजेंद्र ने बताया कि छात्रों को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति शैक्षणिक वर्ष समाप्त होने के बाद भी नहीं मिल पाता है, उसमें सुधार लाया जाए।
प्रदेश के सभी विश्व विद्यालयों में प्रवेश और परीक्षा शुल्क में एकरूपता नहीं है, इस नीति को बंद किया जाए। एबीवीपी के पदाधिकारियों ने अन्य समस्याओं को लेकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी पप्पू गुप्ता को दिया। जबकि तहसील इकाईयों ने भी अपने तहसील स्तर पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर आशुतोष चौहान, सिद्धार्थ मिश्र, प्रद्युमभन त्रिपाठी, सुधीर श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।