फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: ट्रेन में अपर जिला जज को पीटने वाले सिपाही को छह माह की सजा

विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई। ट्रेन में आरक्षित सीट पर सफर कर रहे तत्कालीन अपर जिला जज को पीटने के आरोपी सिपाही को घटना के 17 साल बाद दोषी करार दिया गया। अपर जिला जज (कोर्ट संख्या-3) कुसुमलता ने अभियुक्त को छह माह की सजा सुनाई। उस पर तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
विज्ञापन

बरेली में तैनात रहे तत्कालीन अपर जिला जज लालता प्रसाद ने 16 मई 2009 को जीआरपी लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 16 मई को बरेली से प्रयागराज जाने के लिए वह ट्रेन में सफर रहे थे। हरदोई स्टेशन से ट्रेन चलने के बाद मऊ जनपद के रानीपुर थाना क्षेत्र के बगली निवासी सिपाही भोलानाथ नशे की हालत में ट्रेन में आए थे। लालता प्रसाद को उनकी सीट से उठाने की कोशिश की थी। विरोध करने पर सिपाही ने डंडे से हमला कर उनका गला दबा दिया था। पिटाई भी की थी। गाली-गलौज करते हुए ट्रेन से उतरने पर देख लेने की धमकी भी दी गई थी। कोच में मौजूद यात्रियों ने हस्तक्षेप कर सिपाही को पकड़ लिया था।
जीआरपी चारबाग में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद केस को हरदोई स्थानांतरित कर दिया गया था। पुलिस ने भोलानाथ के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पांच गवाह पेश किए। पीड़ित लालता प्रसाद ने अदालत में घटना का समर्थन किया। सहयात्री अतुल खंडेलवाल ने भी घटना की पुष्टि की। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित की गर्दन, चेहरे और हाथ पर चोटों के निशान मिलने की बात सामने आई थी। बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी के पद के प्रभाव में सिपाही को फंसाया गया लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
विज्ञापन

अदालत ने माना कि मारपीट, गाली-गलौज और धमकी के आरोप अभियोजन ने साबित कर दिए। हालांकि हत्या के प्रयास का आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुआ। इसी आधार पर सिपाही को हत्या के प्रयास के आरोप से बरी करते हुए मारपीट, अपमानित करने और धमकी देने के अपराधों में सजा सुनाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें