शाहाबाद। नगर के सत्संग भवन में आयोजित श्रीराम कथा सुनाते हुए कथा व्यास नरेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि संसार में भक्त दो प्रकार के होते हैं, सिद्ध और साधक। इनमें साधक प्रभु का स्मरण करता है तो सिद्ध पुरुष के हृदय में भगवान का वास हो जाता है।
कहा कि जब हम सुबह उठकर अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं, तब शुरुआत शुभ नाम और काम से होनी चाहिए। विस्तर से उठते ही अपने इष्टदेव का नाम लेने से मंगल होता है। लंका में विभीषण के राम राम नाम लेने से हनुमान जी ने समझ लिया था यह सज्जन व्यक्ति है। एक भक्त जब दूसरे भक्त को देखता है तो हर्षित होता है। कहा कि सज्जन व्यक्ति के ऊपर ईश्वर की कृपा हमेशा रहती है। ऐसा व्यक्ति किसी का अहित नहीं कर सकता है। धर्म कथा की यही कसौटी होती है कि जब तक वक्ता और श्रोता डूब न जाए तब तक कथा कच्ची रहती है। राम का नाम जीभ पर आते ही प्रभु की कृपा की बांसुरी बजने लगती है, क्योंकि भगवान अपना प्रेम देने के लिए जाति नहीं केबल भाव देखते है।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान ने शबरी के झूठे बेर खाए और उसकी केवल भक्ति देखी। कहा कि जिस हृदय में प्रेम है वहां भगवान का डेरा रहता है। राम का नाम सुख पहुंचाता है। सच्चे मन से स्मरण करने वाले भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस मौके पर डा. अविनाश गुप्ता, हर्ष पांडेय, विजय दीक्षित, जयनाथ तिवारी, गोपाल त्रिपाठी, पद्म लाल अरोड़ा, शिवशंकर लाल, बलदेव अरोड़ा, ऋषिकांत अग्निहोत्री आदि मौजूद थे।