पिहानी (हरदोई)। गुनाहों से छुटकारे की रात शबे बरात शुक्रवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि अल्लाह इस रात में बंदों की रोजी-रोटी और जिंदगी-मौत के अहम फैसले लिख देता है। आज रात भर मुसलिम इलाकों में चहल पहल के साथ नातख्वानी और तकरीरों का दौर चलेगा।
शबे बरात इसलामी साल के आठवें महीने शाबान की चौदहवीं रात को मनाई जाती है। अल्लाह के नबी ने शाबान को अपना महीना बताया और रमजान को अल्लाह का महीना कहा है। शाबान में की जाने वाली इबादतों का भी बड़ा सवाब है। शबे बरात में इंसान के आमाल (कार्य) अल्लाह के सामने पेश किए जाते हैं और अगले पूरे साल के लिए उसका रिज्क और जिंदगी मौत के बारे में अहम फैसले लिखे जाते हैं। नबी का इरशाद है कि इस रात में दुआएं कुबूल होती हैं। हदीस है कि शाबान में नबी-ए-करीम सल्ल. पूरे माह रोजे रखते थे और कब्रिस्तान में जाकर उम्मत के लिए दुआएं करते थे।
मुफ्ती नजीब कासमी ने नौजवानोें से शबे बरात पर शांति के साथ इबादतें करने की अपील की है। इधर- उधर टहल कर रात जागने की बजाय मसजिदों और घरों में अल्लाह की इबादत और दुआएं की जानी चाहिए। कहा कि इस रात में कब्रिस्तान जाकर अपने और पूरी कौम के लिए दुआएं करनी चाहिए। अल्लाह इस रात में बंदे की मगफिरत फरमाता है। उधर, पूर्व सभासद मोईनुददीन अंसारी, डा. कमालुद्दीन, मिंहाजुददीन, मोहम्मद आरिफ, अकील अहमद, मोहम्मद नौशाद आदि ने रात भर निर्बाध बिजली आपूर्ति देने की मांग की है।