हरदोई। अपने लिए तो बहुत जी लिए यारो, चलो गरीबों के लिए कुछ यू कर दें। रंगों से खून का कतरा दान कर इंसान होने का फर्ज अदा कर दें...। यह पंक्तियां जिले के ब्लड बैंक में समय समय पर आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर में पहुंचने वाले रक्तदाताओं पर सटीक बैठती है। ब्लड बैंक प्रतिमाह 30-35 गरीबों में जान फूंकने का काम कर रहा है। 500 यूनिट स्टोरेज वाले इस ब्लड बैंक में जिले की एक प्रतिशत आबादी भी अगर रक्तदान के प्रति जागरूक हो जाए तो शायद रक्त की कमी से जिले में किसी की जान नहीं जाएगी।
दुर्घटना के समय, बच्चे को जन्म देते समय मां को तो रक्त चढ़ाने की जरूरत तो होती ही है, थैलसीमिया, एनीमिया, हीमोफिलिया जैसी बीमारियों में भी रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। जिले की ब्लड बैंक में 500 यूनिट खून स्टोरेज करने की क्षमता है, पर शायद ही कभी क्षमता के बराबर यहां रक्त एकत्र हो पाता हो। ऐसे जरूरतमंदों का दर्द समझते हुए अमर उजाला फाउंडेशन ने रक्तदान शिविर एक अक्तूबर को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आयोजित किया है। ब्लड बैंक के जिम्मेदारों की माने तो मार्च से अगस्त तक आठ शिविर लगाए जा चुके हैं, जिसमें 246 यूनिट खून को एकत्र किया गया है। इस एकत्र रक्त से 1468 रक्त यूनिटों से आदान प्रदान किया गया। यानी 1468 लोगों की जान बचाने में दान हुए रक्त का प्रयोग किया गया।
यह तो वह थे जिन्होंने अपना रक्त देकर अपने ग्रुप के मुताबिक खून लिया, पर जिला अस्पताल में वह भी लोग भर्ती होते हैं, जिनका कोई नहीं होता और खून की उन्हें जरूरत तो होती हैं, पर कोई अपना नहीं होता जो इसके बदले में रक्त दान कर सके। जिम्मेदारों की माने तो शिविरों के लगने के बाद प्रति माह 30 से 35 ऐसे रोगियों को ब्लड देकर उनकी जान बचाने का काम किया गया है। दुर्भाग्य इस जिले का यह है कि जिले की आबादी का सिर्फ एक प्रतिशत ही अपना रक्तदान यदि कर दें, तो भी ब्लड बैंक में रक्त की कमी नहीं होगी। ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन अकील अहमद की माने तो इसके बावजूद जितनी भी रक्त की उपलब्धता रहती है उससे प्रतिमाह कई की जाने बचा ली जाती है।
फिलहाल लोगों के इस ओर जागरूक होने की जरूरत है, ताकि अनजान लोगों की भी जाने बचा सकें और अनजाने लोगों से खून का रिश्ता बना सके।
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ज्यादा जानकारी को अमर उजाला के 9675898217, 9451410009 पर संपर्क कर सकते हैं।
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पहले भ्रम दूर करें कि रक्तदान कमजोरी लाता है
हरदोई। जिला चिकित्सालय की ब्लड बैंक के लैब टेकभनीशियन अकील अहमद का कहना है कि रक्तदान कर लोगों को जान बचाने का जज्बा तो लोगों के दिलों में पैदा होता है लेकिन इसके बाद के भ्रम क ो लेकर उनकी उत्सुकता धरी की धरी रह जाती है। उन्होंने कहा कि इस बात से तो वह संतुष्ट हो जाए कि रक्तदान से कोई कमजोरी नहीं आती है। यदि आप पहले से कमजोर होंगे तो आपका रक्त लिया भी नहीं जाएगा। रकत लेने से पहने आपमें कोई बीमारी न हो, आपका वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो और आपका हीमोग्लोविन स्तर समुचित हो तभी आपका रक्त लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन माह के अंतराल पर 16 से 60 वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति एक वर्ष में चार बार तक रक्तदान कर सकता है। अपने मनोमस्तिष्क में यह बात जरूर रखिए कि आपके द्वारा दिए गए एक यूनिट रक्त से तीन रोगियों की जान बचाई जा सकती है।
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डाक्टर बन सकते हमारे लिए प्रेरणा स्रोत
हरदोई। एक चिकित्सक ने एक बार नहीं, बल्कि 14 बार खून देकर रिकार्ड बना रहा है। डीएससीएल हरियावां के चिकित्साधिकारी डा. अतुल शंकर मिश्रा सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। उनका कहना है कि यह तो एक बहाना है कि कमजोरी आती है। शरीर एक मशीन है और उसमें खून का उत्पादन हो रहा है। यदि यह खून किसी के काम आ जाए तो क्या जाता है।
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‘रक्तदान को लेकर भ्रम न पालें जो लोग दूसरों की मदद को आगे आना चाहते हैं, वह अपना रक्तदान कर सकते हैं। इसके बाद कोई भी फर्क नहीं पड़ता है।’ राजू सिंह
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‘वह इससे पहले भी रक्तदान कर चुके हैं। अमर उजाला के पुनीत कार्य ने एक बार फिर से ऐसा करने को उन्हें प्रेरित किया है। इसलिए वह अबकी भी रक्तदान करेंगे।’ आरिफ खां शानू
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अमर उजाला देगा रक्तदाता को प्रमाण पत्र
हरदोई। एक अक्तूबर को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ब्लड बैंक में लगाए जाने वाले रक्तदान शिविर में रक्तदान करने वाले लोगों को अमर उजाला की ओर से प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।