हरदोई। बच्चों में कुपोषण की दर लगातार बढ़ने का नतीजा है कि एक बार फर विश्व स्वास्थ्य को कुपोषण जांचने के मानकों को बदलना पड़ा है। विभागों से तो कुपोषण की जंग लड़ी जा रही, पर गरीबी और मुफलिसी कुपोषण को समाप्त नहीं कर पा रही है। ऐसे में अब कुपोषित बच्चों की नए ग्रोथ चार्ट पर ग्रेडिंग की जाएगी।
डब्लूएचओ द्वारा ग्रोथ चार्ट निर्धारित कर दिया। जिस पर बाल विकास निदेशक ने रेंडम ढंग से आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन कर बच्चों का वजन कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। गरीब गर्भवती महिलाओं की देखरेख को सरकारी अस्पतालों में तो उनको कैल्शियम व विटामिन, आयरन की गोलियां दी जाती हैं। आशा बहू भी दवाओं को वितरित करती हैं, वहीं कार्यकत्रियां भी गर्भवती महिलाओं को केंद्र पर पंजीकृत कर उनकी देखरेख करती हैं, जबकि नवजात बच्चों में कुपोषण न हो इसलिए स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण भी किया जाता है। बच्चों के पोषण स्तर की जांच तथा कुपोषण का पता लगाने को जीरो से पांच वर्ष के बच्चों को कार्यकत्री द्वारा वजन किया जाता है।
अभी तक बच्चों का वजन कराया जाता रहा, पर कुपोषण पर काबू नहीं हो पाया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिर से कुपोषण को जांचने के मानकाें में बदलाव किया है। अब 0-5 वर्ष के बच्चों का वजन कर तीन श्रेणियों में ग्रेडिंग की जाएगी। इसमें सामान्य, आंशिक, अल्प वजन और गंभीर अल्प वजन तीन श्रेणी रखी गई हैं। इन श्रेणियों में वजन को बाल विकास निदेशक एके सिंह ने जिले को पत्र भेजा है। जिसमें उन्हाेंने हर ब्लाक से 10-10 आंगनबाड़ी केंद्रों का रेंडम ढंग से चयन कर उनके पंजीकृत बच्चों का वजन करने के निर्देश दिए हैं। निदेशक ने वजन कर पांच अक्तूबर तक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा बच्चों का वजन लेने के दौरान नियमित रूप से अनुश्रवण करने के निर्देश भी देते हुए अनुश्रवण संबंधी रिपोर्ट हर माह निदेशालय को भेजने को कहा। बाल विकास निदेशालय से पत्र आने के बाद डीपीओ प्रकाश कुमार ने तीन दिन में सूचनाएं मांगी हैं। उन्होंने सीडीपीओ को निर्देश दिए हैं कि रेंडम पर 10 आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन करें और सुपरवाइजरों के निर्देशन में बच्चों का वजन कराएं। बच्चों का वजन ग्रोथ चार्ट पर अंकित कर दें।