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जांच टीम को मिला ही नहीं भवन निर्माण का इस्टीमेट

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जांच टीम को नहीं दिया भवन निर्माण का ब्योरा
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- 100 बेड के अस्पताल में मानकों की अनदेखी का मामला
- राजकीय निर्माण निगम ने कराया है निर्माण
- 15 दिन बाद भी डीएम द्वारा गठित टीम खाली हाथ
अमर उजाला ब्यूरो।
हरदोई।
रोगियों के बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रोड पर नया गांव में बनाए गए 100 बेड के अस्पताल निर्माण में भ्रष्टाचार की बीमारी लग गई। भवन बनकर तैयार हुआ तो जगह-जगह दरारें पड़ गईं। डीएम ने जांच के लिए टीम बनाई लेकिन एक पखवारे बाद भी कार्यदायी संस्था ने भवन निर्माण का ब्योरा और अभिलेख नहीं सौंपे हैं।
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और मौजूदा समय में सदर विधायक नितिन अग्रवाल के प्रयासों से 100 बेड के अस्पताल को मंजूरी मिली थी। लखनऊ रोड पर नया गांव के निकट 34 करोड़ 75 लाख रुपये से इसका निर्माण कराया गया। भवन अभी स्वास्थ्य विभाग को सौंपा भी नहीं गया था कि इसकी दीवारों में दरारें आ गईं। सात जनवरी को अमर उजाला ने नवनिर्मित अस्पताल भवन निर्माण में हुई मानकों की अनदेखी का उल्लेख कर खबर प्रकाशित की। इसे संज्ञान में लेकर डीएम पुलकित खरे ने विशेषज्ञों की टीम गठित कर दी। इसमें लोक निर्माण विभाग के खंड एक के दो सहायक अभियंता और प्रांतीय खंड के एक अवर अभियंता को शामिल किया गया। एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश डीएम ने दिए लेकिन एक पखवारे बाद भी प्रकरण की जांच शुरू नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम में शामिल अभियंताओं को कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने इस्टीमेट नहीं दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसमें भी गड़बड़ी की गई।
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रिमाइंडर भेजा जा रहा : डीएम
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने कहा कि जांच रिपोर्ट नहीं आई है। जांच कमेटी को रिमाइंडर भेजा जा रहा है। अगर जांच कमेटी को अभिलेख नहीं मिल रहे हैं तो ये गंभीर मामला है। राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक से बात की जाएगी।
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